प. बंगाल में अगर कोई सीट पूरे राज्य के सियासी मिजाज का आइना बनी हुई है, तो वह भवानीपुर है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर देशभर की नजरें टिकी हैं। यहां सीएम ममता बनर्जी और भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। मतदान की तारीख करीब आने के साथ चुनावी तापमान भी चढ़ता जा रहा है। कालीघाट से भवानीपुर के जग्गू बाजार की ओर बढ़ते ही सियासत का रंग बदलता नजर आता है।
मां काली की आस्था वाली जमीन पर चुनावी प्रचार भी बहुभाषी हो चुका है। कहीं, ममता के गुजराती में पोस्टर दिखते हैं, तो कुछ दूरी पर ओड़िया भाषा में जय जगन्नाथ लिखे बैनर नजर आते हैं। यहां हर समुदाय और हर वोट तक पहुंचने के लिए पार्टियां अलग-अलग रणनीति के साथ मैदान में हैं। इस बार सिर्फ मुद्दों की नहीं, भरोसा बनाम उन्नयन और भवानीपुर की बेटी की सीधी टक्कर है। दोनों दल एक-एक घर तक पहुंच बनाकर वोटरों को साधने में जुटे हैं।

हर समुदाय को साधने की कोशिश
भवानीपुर में ही प्रसिद्ध आदि शक्तिपीठ कालीघाट काली मंदिर है। पूरा इलाका तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के पोस्टरों-बैनरों से पटा हुआ है। कहीं-कहीं वाम दलों के झंडे भी नजर आ जाते हैं। चक्रबेरिया नंबर 6 में टैक्सी चलाने वाले अजीत बताते हैं कि इस इलाके में गुजराती, ओड़िया, बिहारी और मारवाड़ी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। यही वजह है कि यहां बांग्ला के साथ-साथ गुजराती और ओड़िया भाषा में भी पोस्टर और बैनर दिखाई देते हैं। अजीत कहते हैं कि यहां जय बांग्ला से ज्यादा भगवान जगन्नाथ का नाम सुनाई देता है।

गली नहीं, मकान नहीं, हर एक वोट पर नजर
पद्मपुखुर रोड के निवासी धनंजय कहते हैं, यहां माहौल ऐसा ही है, एक गली में तृणमूल तो दूसरी गली में भाजपा का असर दिखता है। भवानीपुर में मुकाबला गली या मकान का नहीं, बल्कि हर एक व्यक्ति और हर एक वोट का हो गया है। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, दोनों ही पार्टियों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। नतीजे पर धनंजय कहते हैं, कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। यह चुनाव क्रिकेट मैच की तरह है, जो सही रणनीति बनाएगा, बेहतर फील्डिंग सजाएगा और मजबूत बल्लेबाजी करेगा, वही जीतेगा।
2021 के उपचुनाव में ममता की हुई थी बड़ी जीत
तृणमूल कांग्रेस : ममता बनर्जी 85,263 वोट (71.90%)
भाजपा : प्रियंका टिबरेवाल 26,428 वोट (22.29%)
माकपा : श्रीजीब बिस्वास 4,226 वोट (3.56%)
बाहरी बनाम भवानीपुर की बेटी
भाजपा ने भय से मुक्ति व भरोसा का नारा दिया है। इसके मुकाबले तृणमूल उन्नयन और भवानीपुर की बेटी का भावनात्मक कार्ड खेल रही है। ममता का घर कालीघाट क्षेत्र में ही स्थित है। इसे तृणमूल कांग्रेस स्थानीय जुड़ाव के तौर पर पेश कर रही है। वहीं भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु को बाहरी बताने की भी कोशिश हो रही है। तृणमूल का जोर इस बात पर है कि भवानीपुर की बेटी ममता बनर्जी ही हैं, जो लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में साथ रही हैं।
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