कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि गाजा में इस्राइल की कार्रवाई पर केंद्र सरकार की पत्थर जैसी चुप्पी न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि राष्ट्रीय हितों के नजरिये से भी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के अपने पारंपरिक सहयोगियों से दूरी बना ली है और इस कारण देश की कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है।
लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में बच्चों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों को देखते हुए भारत को अपनी आवाज उठानी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के कई देशों ने गाजा में इस्राइल की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है, लेकिन भारत इस मुद्दे पर चुप है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति उपनिवेशवाद विरोध, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में देश उस रास्ते से दूर होता दिख रहा है।
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
- केंद्र सरकार ने गाजा मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।
- सरकार की चुप्पी को नैतिक या रणनीतिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
- भारत वैश्विक जनमत से दूर होता जा रहा है।
- भारत को मानवीय आधार पर फलस्तीनी लोगों के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए।
- गाजा में आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाने पर जोर दिया।
विदेश नीति को लेकर सोनिया गांधी ने क्या कहा?
सोनिया गांधी ने दावा किया कि भारत धीरे-धीरे इस्राइल के रणनीतिक दायरे में जाता दिख रहा है, जबकि दुनिया के कई देश गाजा मुद्दे पर अलग रुख अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को कमजोर किया है। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि इससे पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है, जबकि ऐतिहासिक रूप से भारत इस भूमिका के लिए बेहतर स्थिति में था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल को लेकर क्या टिप्पणी की?
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में प्रधानमंत्री की इस्राइल यात्रा एक हैरान करने वाला रणनीतिक फैसला साबित हो सकती है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित और स्वतंत्र रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसमें बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस बदलाव का असर भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी के लेख पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोनिया गांधी के लेख को साझा करते हुए कहा कि यह लेख भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाता है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि सोनिया गांधी ने अपने लेख के माध्यम से भारत से स्वतंत्र विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और गाजा मुद्दे पर स्पष्ट नैतिक रुख अपनाने की अपील की है।
भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेश नीति के मुद्दे पर भी वोट बैंक की राजनीति कर रही। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सोनिया गांधी लोगों को गुमराह करने और भारत के वास्तविक रुख को छिपाने की कोशिश कर रही हैं।
विदेश नीत पर भाजपा ने क्या जवाब दिया?
पूनावाला ने कहा कि भारत ने गाजा और फलस्तीन के मुद्दे पर कई बार अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता भी भेजी है और संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम के पक्ष में प्रस्तावों का समर्थन किया है। भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइल और फलस्तीन, अमेरिका और रूस-यूक्रेन जैसे विरोधी पक्षों के साथ भी संतुलित संबंध बनाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि यह गुटनिरपेक्षता नहीं, बल्कि ऑल-अलाइनमेंट की नीति है। पूनावाला ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वोट बैंक की राजनीति के कारण कभी इस्राइल के साथ संबंधों को मजबूत नहीं किया। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस गाजा और राफा के मुसलमानों की बात करती है, लेकिन ढाका में हिंदुओं के मुद्दे पर चुप रहती है।