एईएल ने, ओएफ़एसी के ईरान प्रतिबंधों के 32 संभावित सिविल उल्लंघनों को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी के निपटारे पर सहमति जताई.
बयान के अनुसार, नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच एईएल ने दुबई के एक कारोबारी से एलपीजी की खेप खरीदी, जिसने दावा किया था कि वह ओमान और इराक़ की गैस सप्लाई कर रहा है.
हालांकि कई संकेत ऐसे थे जिनसे एईएएल को पता चल जाना चाहिए था कि एलपीजी वास्तव में ईरान से आ रही थी. इस अवधि में एईएल ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी डॉलर वाले 32 भुगतान प्रोसेस करवाए, जिनकी कुल रकम लगभग 19 करोड़ 21 लाख 4 हज़ार 44 डॉलर थी.
न्याय विभाग ने कहा है कि ‘समझौते की राशि ओएफ़सी के इस निष्कर्ष को दिखाती है कि एईएल के संभावित उल्लंघन गंभीर प्रकृति के थे और उनकी जानकारी स्वेच्छा से नहीं दी गई थी.’
स्थाई रूप से ख़ारिज़
विभाग ने कहा, “न्याय विभाग ने मामले की समीक्षा की है और अभियोजन के विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करने का फैसला लिया है.”
इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि अदानी और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र को ‘विद प्रीज्युडिस’ के तहत ख़ारिज़ किया जाए, जिसका मतलब है कि यह मामला दोबारा नहीं खोला जा सकेगा.
यह फैसला उस मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसने अदानी समूह की वैश्विक विस्तार योजनाओं पर असर डालने की आशंका पैदा कर दी थी.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, अमेरिकी आपराधिक मामलों में ‘विद प्रीज्युडिस’ के साथ केस ख़ारिज़ होना काफी दुर्लभ माना जाता है.
आमतौर पर इसका मतलब होता है कि विस्तृत समीक्षा के बाद अभियोजन एजेंसियों ने माना कि मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित