चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर रह गए लोगों को एक और मौका देने के फैसले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और आयोग को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर लोगों के वोट देने के अधिकार से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने चुनाव आयोग के नए आदेश को गलत तरीके से हटाए गए नामों की स्वीकारोक्ति बताया। रमेश ने कहा कि ‘चोरी पकड़ी गई’ तो अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अपनी गलती छिपाने में जुटे हैं।
दरअसल, चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के दौरान एएसडीडी श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का एक और मौका दिया है। एएसडीडी का मतलब अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे नाम वाले मतदाताओं से है। आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नगालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिन मतदाताओं के गणना फॉर्म वापस नहीं मिले थे, उन्हें दोबारा आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा।
जयराम रमेश ने एसआईआर को वोट चोरी का नया तरीका क्यों बताया?
जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग के बार-बार आदेश बदलने से साफ है कि एसआईआर प्रक्रिया में गलतियां हुई हैं। उनके मुताबिक, आयोग ने अब माना है कि एएसडीडी श्रेणी के नाम पर वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए। इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा। रमेश ने आरोप लगाया कि देशभर में एसआईआर के खिलाफ विरोध और नाराजगी बढ़ने के बाद आयोग अपनी गलतियां सुधारने के लिए लगातार नए आदेश जारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मतदान अधिकारों को खतरे में डाल दिया है।
पीएम मोदी और अमित शाह पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से बार-बार स्पष्टीकरण और बदलाव जारी करना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मंशा पर सवाल खड़े करता है। रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर वोट चोरी का नया तरीका है। उन्होंने कहा कि अब जब यह चोरी पकड़ी गई है, तो चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री-गृह मंत्री की जोड़ी अपनी गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। रमेश ने सवाल उठाया कि जब प्रक्रिया में इतनी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, तो देश के नागरिकों को इतने बड़े सरकारी अभियान और प्रशासनिक उलझन से क्यों गुजरना पड़ा?
जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के सामने कौन सी मांगें रखीं?
जयराम रमेश ने कहा कि आयोग की ओर से उठाया गया हर सुधारात्मक कदम दो मांगों को और मजबूत करता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। रमेश ने कहा कि अब ये दोनों मांगें बिल्कुल स्पष्ट हो गई हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग को पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का वोट देने का अधिकार प्रभावित न हो।
आयोग ने छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए क्या व्यवस्था की है?
- आयोग ने सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
- जिन मतदाताओं के गणना फॉर्म वापस नहीं मिले, उनकी बूथवार सूची मतदान केंद्रों पर लगाई जाएगी।
- ये सूचियां पंचायत भवनों, शहरी स्थानीय निकाय कार्यालयों और ब्लॉक विकास अधिकारी कार्यालयों में भी प्रदर्शित होंगी।
- संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर भी सूचियां अपलोड की जाएंगी।
- जिला निर्वाचन अधिकारियों और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को प्रभावित मतदाताओं से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
छूटे हुए मतदाता अपना नाम अंतिम सूची में कैसे जुड़वा सकेंगे?
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को प्रभावित मतदाताओं तक सीधे पहुंचने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए घर-घर जाकर संपर्क किया जाएगा। बूथ स्तर के अधिकारी राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ स्तर के एजेंटों के साथ मिलकर यह काम करेंगे। मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से फॉर्म देने के अलावा व्हाट्सऐप, ईमेल और एसएमएस के जरिए भी सूचना दी जाएगी। जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे अपनी मौजूदा आवासीय स्थिति के आधार पर दोबारा आवेदन कर सकेंगे। इन आवेदनों की जांच मतदाता पंजीकरण अधिकारी करेंगे। यह प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21(1) के तहत होगी। जांच में पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।