जेएनएन, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में वेतन व भत्ता घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। इस घोटाले की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपित आरक्षक गिरीश राय ने पिछले चार माह में अपने वेतन खाते में हर माह लगभग 20 से 30 लाख रुपये जमा कराए।
इस प्रकार पांच माह में उसके खाते में लगभग 1.2 करोड़ रुपये जमा हुए। इस असामान्य भुगतान पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट टीम की नजर गई, जिससे पूरे घोटाले का राजफाश हुआ। मामले में पुलिस ने रविवार को तीन आरोपितों गिरीश, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गिरीश के खाते में वेतन और भत्तों के नाम पर करीब 3.5 करोड़ रुपये जमा होने की आशंका है, जबकि उसका वास्तविक मासिक वेतन केवल 45 हजार रुपये था।
बताया जा रहा है कि गबन की राशि का एक बड़ा हिस्सा उसने शेयर मार्केट में निवेश किया, जहां उसे भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा लग्जरी गाड़ियों की खरीद, बाहरी यात्राओं और अन्य महंगे शौक पर भी बड़ी रकम खर्च की।
पुलिस की टीम अब उसके बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों का ब्यौरा खंगाल रही है। कैग की टीम पिछले एक सप्ताह से एसपी कार्यालय में रिकार्ड की गहन जांच कर रही थी।
जांच के दौरान लगभग 70 पृष्ठों की सूची तैयार की गई है, जिसमें करीब 350 पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान का विवरण शामिल है। इनमें से लगभग 15 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनके खातों में असामान्य तरीके से बढ़ा हुआ वेतन और भत्ता डाला गया।
लंबे समय से वेतन शाखा में पदस्थ था आरक्षक
गिरीश को आरक्षक होने के बावजूद वर्ष 2011 से एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में रखा गया था। उसकी लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना से विभागीय मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है। कुछ माह पहले गिरीश ने जिला पुलिस समिति के बैंक खाते से करीब 70 लाख रुपये निकालने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हो सका।