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ज़ोहरान ममदानी के बयान से फिर चर्चा में कोहिनूर हीरा, ये ब्रिटेन के पास कैसे पहुंचा था?

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Apr 30, 2026


कोहिनूर हीरा

इमेज स्रोत, Tim Graham Photo Library via Getty Images

इमेज कैप्शन, कोहिनूर हीरा
सारांश

  • न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने कहा था कि अगर ब्रिटेन के किंग चार्ल्स से उनकी अलग से बात हुई तो वह उन्हें कोहिनूर लौटाने के लिए कहेंगे
  • किंग चार्ल्स और ममदानी की मुलाक़ात हुई, लेकिन उनके बीच कोहिनूर को लेकर बात हुई या नहीं, यह पता नहीं है
  • लेकिन ममदानी के इस बयान के बाद एक बार फिर कोहिनूर को लेकर चर्चा होने लगी
  • ब्रिटिश ताज पर लगे कोहिनूर की कहानी बीबीसी हिंदी पर पहली बार मई 2021 में प्रकाशित हुई थी
  • पढ़िए कोहिनूर हीरे का सफर, जो नादिरशाह से होता हुआ ब्रिटिश ताज तक पहुंचा

  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

बात 29 मार्च, 1849 की है. किले के बीचोबीच स्थित शीश महल में 10 साल के महाराजा दलीप सिंह को लाया गया. उस बालक के पिता महाराजा रणजीत सिंह एक दशक पहले ही दिवंगत हो चुके थे. उनकी माँ रानी जिंदन कौर को कुछ समय पहले जबरदस्ती शहर के बाहर एक दूसरे महल में भेज दिया गया था.

दलीप सिंह के चारों ओर लाल कोट और हैट पहने अंग्रेज़ों ने घेरा बनाया हुआ था.

थोड़ी देर बाद एक सार्वजनिक समारोह में उन्होंने अपने दरबार के बचे-खुचे सरदारों के सामने उस दस्तावेज़ पर दस्तखत कर दिया, जिसका अंग्रेज़ सरकार बरसों से इंतजार कर रही थी.

कुछ ही मिनटों में लाहौर किले पर सिख खालसा का झंडा नीचे उतारा गया और उसकी जगह ईस्ट इंडिया कंपनी का धारियों वाला झंडा लहराने लगा.

इसके साथ ही सिख साम्राज्य पर न सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रभुत्व हो गया, बल्कि दुनिया का सबसे मशहूर हीरा कोहिनूर भी उनके कब्जे में आ गया.

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