डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों और युवाओं को शराब की लत से बचाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्यों न टेट्रा पैक और प्लास्टिक पाउच जैसी ‘भ्रामक पैकेजिंग’ में शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
यह चिंताजनक मामला है कि ऐसे पैकेटों का रूप फलों के जूस जैसा होता है, जिससे अनजाने में युवा और कम उम्र के लोग आसानी से भ्रमित हो जाते हैं।
कोर्ट ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि शराब बिक्री केंद्रों पर उम्र की जांच के लिए कोई पुख्ता और प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है, जिससे नाबालिगों तक आसानी से पहुंच बन रही है।
भ्रामक पैकेजिंग व जूस जैसे दिखने वाले पैक पर सवाल
याचिकाकर्ता एनजीओ ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विपिन नायर ने कोर्ट को बताया कि देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘चिली मैंगो वोडका’ जैसे आकर्षक नामों और फलों के रस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में शराब बेची जा रही है, जिस पर अल्कोहल की मात्रा बेहद छोटे अक्षरों में लिखी होती है।
यह स्थिति न केवल युवाओं को गुमराह करती है, बल्कि समाज में नशे की प्रवृत्ति को भी चुपचाप बढ़ावा दे रही है।
पैकेजिंग उद्योग का पक्ष और कोर्ट की अगली कार्रवाई
दूसरी ओर, पेपर-आधारित कार्टन पैकेजिंग इंडस्ट्री (एक्शन अलायंस फार रीसाइक्लिंग बेवरेज कार्टन – एएआरसी) का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने दलील दी कि यह कानूनी अनुमति पिछले 21 वर्षों से सुचारू रूप से चल रही है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश जुड़ा हुआ है।