व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाता डिनर आयोजन में हुई गोलीबारी पर मीडिया वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा, शनिवार की शाम अभिव्यक्ति की आजादी का जश्न मनाने के लिए थी। लेकिन एक सनकी व्यक्ति ने इस कार्यक्रम में खलल डाल दिया। वह व्यक्ति राष्ट्रपति और प्रशासन के कई अधिकारियों की हत्या करने के इरादे से पूरे देश का सफर तय करके यहां पहुंचा था।
प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने क्या कहा?
लेविट ने बताया कि पिछले दो साल में राष्ट्रपति ट्रंप पर यह तीसरा बड़ा जानलेवा हमला है। इतिहास में किसी भी अन्य राष्ट्रपति ने अपने जीवन पर इतने गंभीर और बार-बार हमले नहीं झेले हैं। उन्होंने उन बहादुर सुरक्षाकर्मियों का आभार जताया जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावर को पकड़ा और सबको सुरक्षित रखा। इस दौरान सीक्रेट सर्विस के एक जांबाज एजेंट के सीने में गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट ने उसकी जान बचा ली।
प्रेस सचिव ने ट्रंप पर कही ये बात
प्रेस सचिव ने कहा कि हमले के समय राष्ट्रपति ट्रंप का शांत रहना वाकई काबिले तारीफ था। वह निडर हैं क्योंकि वह अपने देश से प्यार करते हैं। वह जनता से किए वादे पूरे करने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को तैयार हैं। लेविट ने जोर दिया कि समाज में राजनीतिक हिंसा का डर नहीं होना चाहिए। देश में कड़े मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें शांतिपूर्ण बहस, विरोध और वोट के जरिए सुलझाना चाहिए। विवाद सुलझाने का रास्ता गोलियां नहीं हो सकतीं।
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डेमोक्रेटिक पार्टी को ठहराया हमले का जिम्मेदार
लेविट ने इस हिंसा के लिए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और मीडिया के एक हिस्से को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल से राष्ट्रपति के खिलाफ लगातार नफरत फैलाई जा रही है। उन्हें ‘फासीवादी’, ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’ और ‘हिटलर’ कहना हिंसा को बढ़ावा देता है। हमलावर के घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) की बातें भी वैसी ही हैं जैसी सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर रोज सुनने को मिलती हैं।
अंत में, उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) को फंड देने की मांग की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी कांग्रेस ने 73 दिनों से इस जरूरी एजेंसी का बजट रोक रखा है। यह अमेरिकी इतिहास में किसी संघीय एजेंसी की सबसे लंबी तालाबंदी है। इसका सीधा असर सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने अपील की कि राष्ट्रपति और उनके परिवार के खिलाफ झूठ फैलाना बंद होना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
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