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‘डॉग फ़्रूट’ से लेकर ‘डार्लिंग’ तक का सफ़र: भारत में एवोकाडो कैसे मशहूर हो रहा है

Byadmin

Sep 8, 2026


कोट्टानाड प्लांटेशन्स से एवोकाडो की एक टोकरी

इमेज स्रोत, Cottanad Plantations

इमेज कैप्शन, भारत में एवोकाडो की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है.

मधु बोपैया याद करते हैं कि 15 साल पहले भारत में एवोकाडो का लगभग कोई बाज़ार नहीं था.

वो कहते हैं कि पके हुए फल पेड़ों से गिर जाते थे और कुत्ते उन्हें खा जाते थे. इस वजह से एवोकाडो को एक अरुचिकर नाम कुत्तों का फल या ‘डॉग फ्रूट’ मिल गया था.

बोपैया पिछले 26 साल से भारत के प्लांटेशन उद्योग में काम कर रहे हैं. फ़िलहाल वह दक्षिण भारत के केरल राज्य के वायनाड की पहाड़ियों में कोको, रबर, कॉफ़ी, मसालों और एवोकाडो समेत दूसरे फलों की खेती करने वाली कॉटनाड प्लांटेशंस में ग्रुप मैनेजर हैं.

वो कहते हैं, “हमने कभी एवोकाडो को अपनी मुख्य फ़सल के तौर पर नहीं लगाया. हमने इसे कॉफ़ी के बागान में छायादार पेड़ के तौर पर लगाया था और बाद में हमें एहसास हुआ कि यह एक फ़ायदेमंद कारोबार बन सकता है.”

उनके मुताबिक़, बदलाव का दौर 2011 के आसपास आया, जब बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने कहा कि वह त्वचा की देखभाल के लिए एवोकाडो का इस्तेमाल करती हैं.

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