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तालिबान के पांच साल: शरिया क़ानून से क्या बदला, आज कहां खड़ा है अफ़ग़ानिस्तान

Byadmin

Aug 17, 2026


तालिबान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 15 अगस्त 2021 को तालिबान के लड़ाके काबुल में दाख़िल हुए थे

काबुल के दक्षिण में स्थित एक गाँव के सफ़ेद रंग से पुते तहख़ाने में क़रीब 12 महिलाएं काम में लगी हैं. वे उबलते हुए चेरी और बेर से भरे बर्तनों को हिला रही हैं और जैम के कांच वाले जारों पर लेबल चिपका रही हैं.

तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान में इस तरह के काम के धंधे उन कुछ दुर्लभ अवसरों में से एक हैं जहाँ महिलाएँ अभी भी कौशल और रोज़गार प्राप्त कर सकती हैं.

इसे 47 साल की एक अफ़ग़ानी उद्यमी और नौ बच्चों की मां नाज़िया चला रही हैं. उनकी शादी 14 साल की उम्र में हुई थी. यहां काम करने वाली युवतियों में वर्कशॉप की संचालिका नाज़िया की बेटी भी शामिल हैं.

अगर प्रशासन ने लड़कियों और युवतियों को मिडिल स्कूल और विश्वविद्यालयों में जाने से नहीं रोका होता, तो इस वर्कशॉप में काम कर रहीं वे सब युवतियां अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए पढ़ाई कर रही होतीं.

जैम बनाने की वर्कशॉप में महिलाएँ हुनर सीखने के साथ रोज़गार का अवसर भी तलाश रही हैं
इमेज कैप्शन, जैम बनाने की वर्कशॉप में महिलाएँ हुनर सीखने के साथ रोज़गार का अवसर भी तलाश रही हैं

लेकिन अब इस तरह के कामों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है.

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