अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतें बेलगाम हो गई हैं। पिछले एक महीने में चीनी की कीमत खुदरा बाजार में 48.18 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। यानी एक किलो पर लगभग 17 रुपये की बढ़ोतरी।
यही नहीं, खुदरा बाजार में कुछ जगहों पर तो यह अभी 70 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। इससे चिंतित सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए तीन स्तरों पर काम कर रही है।
बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए आयात का सहारा लिया जा रहा है, तो जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा लगाने के साथ निगरानी बढ़ा दी गई है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नए गन्ना सत्र में जल्द पेराई शुरू करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
मकसद है कि नई फसल आने तक बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतों पर दबाव कम हो। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने चीनी मूल्य में तेजी के लिए एथनाल नीति को जिम्मेदार मानने से इन्कार किया है।
यह भी कहा है कि अक्टूबर में पेराई शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टाक है। हालांकि, कीमतों में तेज वृद्धि स्टाक में कमी की ओर इशारा करती है।
सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कुछ चीनी मिलों और कारोबारियों की जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका जताई है। इसे रोकने के लिए 30 नवंबर तक कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टाक सीमा लागू की गई है।
एक सितंबर से थोक उपभोक्ता भी अपनी 15 दिन की खपत से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्यों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेंगी।
बाजार में तत्काल आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया जाएगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मांग बढ़ती है। दूसरी ओर नई पेराई अक्टूबर में शुरू होगी। ऐसे में अगले डेढ़-दो महीने बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत में प्रतिवर्ष औसतन 320-340 लाख टन चीनी बनती है, जबकि घरेलू जरूरत 280-290 लाख टन है। इस तरह 40-50 लाख टन का स्टाक रहता है, जो बाजार को सुरक्षा देता है। इस बार उत्पादन घटने से स्टॉक पर असर पड़ा है।
मौजूदा चीनी सत्र में उत्पादन का प्रारंभिक अनुमान करीब 343 लाख टन था, जो घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है। यानी अनुमान से करीब 37 लाख टन कम। इसकी प्रमुख वजह गन्ने में रेड राट और टॉप बोरर रोग को बताया गया है। साथ ही अत्यधिक बारिश से जलभराव के कारण गन्ना उत्पादन में कमी भी इसका बड़ा कारण है।
वैश्विक बाजार में भी चीनी की उपलब्धता तंग है
वैश्विक बाजार में भी चीनी की उपलब्धता तंग है। 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर हो गई।
दो महीने से भी कम समय में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे आयात भी सस्ता विकल्प नहीं रह गया। बावजूद घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया जा रहा है।

सरकार ने किया एथनॉल नीति का बचाव
एथनॉल नीति का बचाव करते हुए सरकार का दावा है कि वर्ष 2022-23 में एथनॉल के लिए 12 प्रतिशत चीनी डायवर्ट की गई थी, जो इस बार घटकर नौ प्रतिशत रह गई है। देश में बनने वाले एथनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज और खासकर मक्के से बनाया जा रहा है।
अतिरिक्त चीनी को एथनॉल में बदलने से चीनी मिलों की हालत सुधरी है और किसानों को भुगतान में मदद मिली है। सरकार ने चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का आग्रह किया है, ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ सके और कीमतों पर दबाव कम हो सके।
