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त्यौहारों में कम नहीं होगी चीनी की मिठास, सरकार ने बना लिया मास्टर प्लान

Byadmin

Aug 21, 2026


अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। त्योहारों से पहले चीनी की तेजी से बढ़ती कीमतों से चिंतित सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए तीन स्तरों पर काम कर रही है। बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए आयात का सहारा लिया जा रहा है तो जमाखोरी रोकने के लिए स्टाक सीमा लगाने के साथ निगरानी बढ़ा दी गई है।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नए गन्ना सत्र में जल्द पेराई शुरू करने का प्रयास भी किया जा रहा है। मकसद है कि नई फसल आने तक बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतों पर दबाव कम हो।

उपायों की सफलता अगले कुछ महीनों में कीमतों के आधार पर तय होगी। फिलहाल केंद्र सरकार ने चीनी मूल्य में तेजी के लिए एथनॉलनीति को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है।

देशभर में कैसे पूरी होगी चीनी की मांग?

तर्क है कि 2022-23 में 12 फीसद एथनॉल डाइवर्ट किया गया था जबकि 2025-26 में नौ फीसद। यह भी दावा भी किया है कि अक्टूबर में पेराई शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टाक है। हालांकि कीमतों में तेज वृद्धि स्टाक में कमी की ओर इशारा करती है।

सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कुछ चीनी मिलों और कारोबारियों की जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका जताई है। इसे रोकने के लिए 30 नवंबर तक कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टाक सीमा लागू की गई है।

एक सितंबर से नहीं करेंगे जमाखोरी 

एक सितंबर से थोक उपभोक्ता भी अपनी 15 दिन की खपत से अधिक का स्टाक नहीं रख सकेंगे। जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्यों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टाक का भौतिक सत्यापन करेंगी।

पिछले एक महीने में चीनी की कीमत 48.18 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। खुदरा बाजार में यह 70 रुपये से भी अधिक हो गई है। बाजार में तत्काल आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया जाएगा।

क्यों बढ़ी चीनी की मांग?

अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मांग बढ़ती है। दूसरी ओर नई पेराई अक्टूबर में शुरू होगी। ऐसे में अगले डेढ़-दो महीने बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत में प्रतिवर्ष औसतन 320-340 लाख टन चीनी बनती है, जबकि घरेलू जरूरत 280-290 लाख टन है। इस तरह 40-50 लाख टन का स्टाक रहता है, जो बाजार को सुरक्षा देता है।

इस बार उत्पादन घटने से स्टाक पर असर पड़ा है। मौजूदा चीनी सत्र में उत्पादन का प्रारंभिक अनुमान करीब 343 लाख टन था, जो घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है।

यानी अनुमान से करीब 37 लाख टन कम। इसकी प्रमुख वजह गन्ने में रेड राट और टाप बोरर रोग को बताया गया है। साथ ही अत्यधिक बारिश से जलभराव के कारण गन्ना उत्पादन में कमी भी इसका बड़ा कारण है। वैश्विक बाजार में भी चीनी की उपलब्धता तंग है।

क्या है सरकार का मास्टर प्लान?

2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून के 474 डालर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डालर हो गई।

दो महीने से भी कम समय में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे आयात भी सस्ता विकल्प नहीं रह गया। बावजूद घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया जा रहा है।

एथनॉल नीति का बचाव 

एथनॉल नीति का बचाव करते हुए सरकार का दावा है कि वर्ष 2022-23 में एथनॉलके लिए 12 प्रतिशत चीनी डायवर्ट की गई थी, जो इस बार घटकर नौ प्रतिशत रह गई है। देश में बनने वाले एथनॉलका लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज और खासकर मक्का से बनाया जा रहा है।

अतिरिक्त चीनी को एथनॉलमें बदलने से चीनी मिलों की हालत सुधरी है और किसानों को भुगतान में मदद मिली है। सरकार ने चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का आग्रह किया है, ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में नई चीनी की आपूर्ति बढ़ सके और कीमतों पर दबाव कम हो सके।

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