जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आने के बाद भले ही स्कूली शिक्षा में सुधार के बड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन स्थिति यह है कि देश में अभी भी एक लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। जो स्कूलों में पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को सभी विषय पढ़ा रहे हैं।
वहीं, देश में अभी भी पांच हजार से अधिक स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी बच्चे का नामांकन नहीं है। यह स्थिति तब है, जब रिपोर्ट में स्कूलों में शिक्षकों की संख्या के बढ़ने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में देश के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या जहां 1.01 करोड़ थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई है।
देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर यह बात यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन प्लस ( यूडीआइएसई प्लस) की 2025-26 की रिपोर्ट के जरिये सामने आई है।
रिपोर्ट में शिक्षकों की संख्या में हुई बढ़ोतरी को सबसे बड़ी उपलबब्धि के तौर पर पेश किया गया है। इसमें बताया गया है कि 2024-25 में देश में शिक्षकों की कुल संख्या 1,01,22,420 थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,02,73,020 हो गई है।
हालांकि, इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में अभी 100843 स्कूल ऐसे हैं, जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
हालांकि वर्ष 2024-25 में ऐसे स्कूलों की संख्या 104125 थी। यह बात अलग है कि स्कूलों में बेटियों के नामांकन दर में सुधार हुआ है।
2024-25 में यह संख्या 48.3 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 48.4 प्रतिशत हो गई है। वहीं स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, जो कुल शिक्षकों में अब 54.9 प्रतिशत हो गई है। पहले यह 54.2 प्रतिशत थी।
बच्चों की स्कूल छोड़ने की दर घटी
स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले जो बड़ा बदलाव इस बार देखने को मिला है, उनमें स्कूलों में बच्चों की ड्रापआउट दर का घटना है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में पारंभिक और माध्यमिक स्तर पर पिछले साल की तुलना में ड्रॉपआउट दर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। स्कूलों में प्रारंभिक स्तर पर 2024-25 में ड्रॉपआउट दर जहां 2.3 प्रतिशत थी, वहीं 2025-26 में यह 1.8 रह गई है।
माध्यमिक स्तर पर भी 2024-25 में ड्राप आउट दर 8.2 थी, जबकि 2025-26 में यह 7.0 प्रतिशत ही रह गई है। हालांकि मिडिल स्तर पर ड्राप आउट 2024-25 की तुलना में बढ़ा है। जो 3.5 से बढ़कर 3.6 प्रतिशत हो गया है।
स्कूलों की स्थिति
- 69.9 प्रतिशत में कंप्यूटर,
- 67.4 प्रतिशत में इंटरनेट,
- 95 प्रतिशत में बिजली,
- 99.5 प्रतिशत में साफ पीने का पानी,
- 98.5 प्रतिशत में बेटियों के लिए शौचालय,
- 81.9 प्रतिशत स्कूलों में खेल का मैदान,
- 90 प्रतिशत में पुस्तकालय है।
इनमें 2024-25 के मुकाबले सुधार हुआ है।