डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के पूर्व अधिकारी को बरी कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें दोषी ठहराए जाने की सजा बरकरार रखी गई थी। यह मामला ट्रांसफर और पोस्टिंग के एवज में रिश्वत मांगने से जुड़ा था।
आरोप था कि आरपीएफ के डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर के तौर पर काम करते हुए अपीलकर्ता ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
उन्होंने ट्रांसफर, पोस्टिंग और नौकरी से जुड़े दूसरे फायदे चाहने वाले आरपीएफ कर्मचारियों से, बिचौलिये के तौर पर काम करने वाले अपने मातहत अधिकारियों के जरिये गैर-कानूनी तौर पर पैसे या फायदे की मांग की और उन्हें हासिल किया।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई। इसने कहा कि सीबीआई ने शिकायत मिलने के अगले ही दिन यानी चार अगस्त 2005 को बिना औपचारिक एफआइआर दर्ज किए ही सत्यापन शुरू कर दिया और रिश्वत मांगने के आरोप की जांच के लिए फौरन जाल (ट्रैप) बिछा दिया। पीठ ने इसे जांच एजेंसी की “गंभीर खामी और जल्दबाजी” करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई यह साबित करने में नाकाम रही कि बरामद रिश्वत की रकम वास्तव में उसी सरकारी कर्मचारी के लिए थी। यदि एजेंसी निगरानी रखती, तो सबूत अधिक पुख्ता होते। इन सभी खामियों और संदेह का फायदा अपीलकर्ता को मिला है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)