डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-चीन अंतर्राष्ट्रिय सीमा क्षेत्र नाथुला के रासते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही है। यह यात्रा जून महीने में शुरू होने वाली है।
इसे लेकर राज्य पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा निर्मित कैलाश मानसरोवर यात्रा अनुकूलन केंद्र-1 का शुक्रवार को 18वें माइल क्षेत्र में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण विभाग के पीसीई-सह-सचिव नीरज प्रधान और अन्य अधिकारियों ने की।
करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर 2.02 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस परियोजना की कुल लागत 42.23 करोड़ रुपये है। परियोजना को भारत सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनार) द्वारा वित्तपोषित किया गया है, जबकि इसका कार्यान्वयन सिक्किम सरकार के पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा किया गया।
कब शुरू हुई थी परियोजना?
परियोजना का निर्माण कार्य 14 फरवरी 2018 को शुरू हुआ था और 28 फरवरी 2026 को पूरा हुआ। केंद्र में चार दो-बेड वाले यूनिट, दो पांच-बेड वाले यूनिट, इंफर्मरी, डाइनिंग-कम-किचन सुविधा तथा कार्यालय-सह-चिकित्सा इकाई की व्यवस्था की गई है।
यहां कुल 126 यात्रियों के ठहरने की क्षमता उपलब्ध है। निरीक्षण के दौरान कैलाश पर्वत की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा के लिए विशेष पूजा-अर्चना भी आयोजित की गई। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 50-50 यात्रियों के दस दल गुजरेंगे।
यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 19 मई 2026 को समाप्त होगी। अनुकूलन इस लिए भी आवश्यक है कि ऊंचाई वाले क्षेत्र में यात्रियों को स्वास लेने में समस्या ना हो और वे स्थानीय वातावरण के अनुरूप खुद को शारीरिक और मानिसक रूप से तैयार कर सके।