पीटीआई, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की आंच अब भारतीय विमानन क्षेत्र तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा घरेलू एयरलाइंस को राहत देने के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्कों में 25 प्रतिशत की कटौती के फैसले ने निजी एयरपोर्ट ऑपरेटरों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
‘एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर्स’ (एपीएओ) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि इस कटौती से उनकी आर्थिक स्थिरता, कर्ज चुकाने की क्षमता और दैनिक संचालन पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
राजस्व घाटे की भरपाई की मांग एपीएओ, जिसमें जीएमआर और अदाणी समूह जैसे दिग्गज शामिल हैं, ने एयरपोर्ट आर्थिक नियामक प्राधिकरण (एईआरए) के इस फैसले को ‘मनमाना’ बताया है।
ऑपरेटरों का तर्क है कि लैंडिंग शुल्कों में कमी से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर यूजर डेवलपमेंट फीस बढ़ा दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि अभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से यह शुल्क नहीं लिया गया, तो भविष्य में इसकी भरपाई करना और भी कठिन होगा।
एयरलाइंस को लाभ, एयरपोर्ट्स पर दबाव एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठाया है कि क्या लैं¨डग चार्जेस में दी गई इस छूट का लाभ वास्तव में यात्रियों को मिलेगा?
पत्र में कहा गया है कि एयरलाइंस के किराये अनियंत्रित हैं, ऐसे में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि टिकट सस्ते होंगे। एयरपोर्ट ऑपरेटरों ने सुझाव दिया है कि सरकार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को राजस्व हिस्सेदारी के भुगतान को फिलहाल टालने का निर्देश दे और राज्यों से एटीएफ पर वैट घटाकर पांच प्रतिशत करने की अपील करे।
वर्तमान में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित 14 प्रमुख एयरपोर्ट इस वित्तीय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं, जहां वे सार्वजनिक लाभ और अपनी आर्थिक उत्तरजीविता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।