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यूएई के ओपेक से बाहर होने का भारत पर क्या असर होगा

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May 1, 2026


विश्व के राजनीतिक मानचित्र पर, OPEC सदस्य देशों के झंडों के रंगों वाले तेल के बैरल.

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, शुभांगी मिश्रा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिका और इसराइल के ईरान के साथ युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन बाजार में अनिश्चितता के बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने मंगलवार को घोषणा की कि वह एक मई को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से बाहर हो जाएगा.

ओपेक 12 सदस्य देशों का एक समूह है, जो प्रमुख तेल उत्पादक देशों का कार्टेल है. ओपेक अपने सदस्य देशों के लिए तेल उत्पादन का कोटा तय करता है.

यूएई के बाहर होने का मतलब है कि अब वह तेल उत्पादन पर लगाए गए इस गठबंधन के कोटा सिस्टम से बंधा नहीं रहेगा. यूएई 2016 में बने ओपेक प्लस गठबंधन से भी बाहर हो जाएगा. इसमें ओपेक के सभी सदस्य देशों के साथ 10 अतिरिक्त देश शामिल हैं.

यूएई के ऊर्जा मंत्रालय ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह फ़ैसला ‘राष्ट्रीय हितों की जरूरतों को देखते हुए’ लिया गया है.

बयान में कहा गया, “यह फ़ैसला संयुक्त अरब अमीरात की दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि के अनुरूप है और इसके ऊर्जा क्षेत्र के विकास को दिखाता है. इसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में निवेश बढ़ाने में तेजी लाना शामिल है. साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार के भविष्य को देखते हुए एक जिम्मेदार और भरोसेमंद उत्पादक के रूप में अपनी भूमिका के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना भी शामिल है.”

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