केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से जुड़े एक सरकारी अधिकारी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की इस जांच से पता चला है कि परीक्षा से कई दिन पहले ही असली पेपर लीक हो गया था और इसके पीछे एक बहुत बड़ा और शातिर नेटवर्क काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद से शिक्षा विभाग और 23 लाख छात्रों के बीच भारी हड़कंप मच गया है।
सीबीआई ने अदालत को बताया है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने एनटीए के एक अधिकारी के साथ मिलकर गहरी साजिश रची थी। 14 मई को गिरफ्तार की गई आरोपी मनीषा संजय वाघमारे और 15 मई को पकड़े गए केमिस्ट्री के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी ने पूछताछ में कई बड़े राज खोले हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा वाघमारे को 27 अप्रैल को ही परीक्षा के प्रश्न पत्र और उनके उत्तर मिल गए थे। इसके बाद उसने ये सवाल अहमदनगर से गिरफ्तार किए गए धनंजय लोखंडे और अन्य आरोपियों को लाखों रुपये लेकर बेच दिए।
बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे ने पेपर लीक में क्या खेल किया?
इस मामले में सीबीआई ने शनिवार को बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा मंधारे को भी गिरफ्तार कर लिया है। मनीषा मंधारे एनटीए की उस खास कमेटी का हिस्सा थीं जो नीट का पेपर तैयार करती है। सीबीआई के अनुसार, मंधारे की बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्न पत्रों तक पूरी पहुंच थी। उसने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में पुणे स्थित अपने घर पर बच्चों के लिए विशेष कोचिंग क्लास लगाई थी। इस क्लास में उसने बच्चों से लाखों रुपये की फीस लेकर लीक हुए सवाल और उनके जवाब रटाए थे। जांच में पाया गया कि ये सभी सवाल 3 मई को हुई असली परीक्षा में बिल्कुल वैसे ही आए थे।
केमिस्ट्री के एक्सपर्ट ने कैसे रटाए सवाल और सबूत कैसे मिटाए?
मनीषा मंधारे की तरह ही लातूर के रहने वाले केमिस्ट्री के एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने भी अपने पद का भारी दुरुपयोग किया। कुलकर्णी कई वर्षों से नीट का पेपर सेट करने वाले पैनल में शामिल रहे हैं। सीबीआई का कहना है कि कुलकर्णी ने भी अप्रैल के अंतिम हफ्ते में अपने घर पर छात्रों को बुलाकर पेपर के सवाल और उनके जवाब लिखवाए थे। पकड़े जाने के डर से कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे ने 3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद हाथ से लिखे हुए उन सभी सवालों के पन्नों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था ताकि कोई सबूत न बचे।
नीट परीक्षा रद्द होने के बाद एनटीए ने क्या कार्रवाई की?
पूरे देश में नीट की यह परीक्षा 3 मई को 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस बड़ी परीक्षा में लगभग 23 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के मुताबिक, परीक्षा होने के चार दिन बाद 7 मई की शाम को उन्हें पेपर लीक होने और धांधली की गुप्त जानकारी मिली थी। इसके तुरंत बाद अगली सुबह एनटीए ने यह मामला स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया। धांधली की सच्चाई सामने आने के बाद यह परीक्षा पूरी तरह से रद्द कर दी गई है और सीबीआई की टीमें तेजी से मामले की जांच कर रही हैं।