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नेपाल त्रासदी के बाद भारत-चीन का फैसला, बाढ़ और नदियों के डेटा पर देंगे एक-दूसरे का साथ

Byadmin

Aug 27, 2026


जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। जब चीन की तरफ से आई बाढ़ से नेपाल में भारी तबाही मची है और इसका असर भारत के कुछ हिस्सों पर पड़ने की आशंका है, तब भारत और चीन ने फैसला किया है कि साझा नदियों के प्रबंधन व सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर गठित विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र की बैठक सितंबर, 2026 में होगी।

साथ ही दोनों पक्ष हाइड्रोलाजिकल (जल प्रवाह से जुड़ी जानकारी) डाटा साझा करने और संबंधित समझौतों के नवीकरण पर भी विमर्श जारी रखने की सहमति बनी है। तिब्बत के इलाके में कई बड़ी जलबिजली परियोजना लगाने की चीन की योजना को लेकर भारत कई बार अपनी चिंता जता चुका है। अगले महीने होने वाली बैठक इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगी।

इसके अलावा सीमा प्रबंधन सुधारने के लिए जनरल लेवल मैकेनिज्म व वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठक आयोजित करने के लिए दो अन्य जगहों का चयन किया गया है। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर विमर्श करने के लिए पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में सीमा सैन्य हाटलाइन के दो अतिरिक्त चैनल भी शुरू करने की सहमति बनी है।

चीन-भारत सीमा विवाद पर फैसला

ये सारे फैसले 25 अगस्त, 2026 को बीजिंग में चीन-भारत सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं दौर की बैठक में हुए हैं। चीन के विशेष प्रतिनिधि, सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य और केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग कार्यालय के निदेशक वांग यी तथा भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में यह बैठक हुई।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान यह संकेत देते हैं कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के आगामी भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच एक सकारात्मक माहौल बनाया गया है। चिनफिंग पीएम नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण में 12-13 सितंबर, 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आने वाले हैं।

अनुकूल माहौल बनाने की प्रतिबद्धता

विशेष प्रतिनिधि स्तर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान से यह पता चलता है कि तकरीबन 3500 किलोमीटर लंबी सीमा (वास्तविक नियंत्रण रेखा) को सुलझाने को लेकर दोनों पक्ष काफी सावधानीपूर्वक लेकिन आगे बढ़ रहे हैं। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन को बनाए रखने, सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों के स्वस्थ व स्थिर विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने 2005 में भारत व चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर किए समझौते व प्रतिनिधि स्तर वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप बातचीत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इसका लक्ष्य सीमा विवाद का एक निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान हासिल करना है।

सीमा प्रबंधन व सीमा परिसीमन पर चर्चा

भारत व चीन ने कहा है कि सीमा प्रबंधन पर गठित कार्य दल (डब्ल्यूएमसीसी) और सीमा परिसीमन के लिए गठित विशेषज्ञ समूह शीघ्र व ठोस परिणाम पर चर्चा आगे बढ़ाएंगे। दोनों समूहों का पहला काम अपने-अपने कार्य क्षेत्र पर सहमति बनाना होगा।

दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि जमीनी स्तर पर किसी भी स्थिति को मौजूदा राजनयिक व सैन्य चैनलों, डब्ल्यूएमसीसी, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकों और अन्य सहमत तंत्रों के जरिये तुरंत सुलझाने की कोशिश की जाएगी ताकि लंबित मुद्दों का समाधान हो और एलएसी पर गलतफहमी व गलत आकलन से बचा जा सके।

भारत ने चीन द्वारा तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में माउंट गंग रेनपोछे और मापम युन त्सो झील की भारतीय आधिकारिक तीर्थयात्रा के बैच बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। दोनों पक्षों ने तीन नामित सीमा व्यापार बिंदुओं के फिर से खुलने की सराहना की। सीमा व्यापार, तीर्थयात्रा व अन्य क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी है।

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