अरविंद पांडेय, जागरण अलवर। देश में वैसे तो 58 बाघ अभयारण्य और करीब 3682 बाघ है लेकिन इनमें से बाघों की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी पांच से छह अभयारण्यों में ही पायी जाती है। वहीं 22 से अधिक बाघ अभयारण्य ऐसे है जो या तो बाघ विहीन या फिर उनमें बाघों की संख्या बेहद कम है।
ऐसे में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के साथ मिलकर पलामू (झारंखड) और बक्सा अभयारण्य (बंगाल) सहित बाघ विहीन या कम बाघ वाले 22 अभयारण्यों में बाघों की मौजूदगी को बढ़ाने की एक नई योजना पर काम शुरू किया है। इनमें से करीब पांच से छह अभयारण्यों को जल्द दूसरे राज्यों से बाघ मुहैया कराने की सहमति भी दे दी गई है। इसे लेकर इन अभयारण्यों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। इनमें पलामू भी एक है।
सम्मेलन में विस्तृत चर्चा शुरू
राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य में बाघों के पुनर्स्थापन के अवसर और चुनौतियों को लेकर रविवार से शुरू हुए दो दिनी सम्मेलन में इसे लेकर विस्तृत चर्चा शुरू हुई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इनका बेहतर प्रबंधन जरूरी हो गया है।
ऐसे में सभी बाघ अभयारण्यों की क्षमता, मौजूदा समय में बाघों की उपस्थिति और उससे जुडी कार्ययोजना की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने इस दौरान वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अभयारण्य के आस-पास रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरिस्का को इस सम्मेलन के लिए इसलिए चुना गया है कि यह बाघों की पुनर्बहाली की एक बड़ा उदाहरण है।
जहां 2008 से पहले बाघ खत्म हो गए। 2008 में यहां तीन बाघ लाए गए थे। जो आज बढ़कर 56 बाघ हो गए है। इसी तरह मध्य प्रदेश के पन्ना में भी बाघों को नए सिरे लाया गया था। जहां अब 88 बाघ हो गए है। इस मौके पर राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरिस्का में बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। अगले दो सालों में यहां बाघों की संख्या सौ से पार हो जाएगी।
गौरतलब है कि इस सम्मेलन में सतकोसिया व मुकुंदरा बाघ अभयारण्यों में बाघों के हुए पुनर्वास की अफललता पर भी चर्चा हुई। साथ ही भविष्य की योजनाओं में इन गलतियों को न दोहराने पर भी जोर दिया गया।
आम लोगों के लिए खुलेंगे वन्यजीव अभयारण्यों में मौजूद प्राचीन व धार्मिक स्थल
वन्यजीवों अभयारण्यों के साथ लोगों के जुड़ाव को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक दिशा-निर्देश लाने की तैयारी है, जिसमें वन्यजीव अभयारण्यों में मौजूद प्राचीन और धार्मिक स्थलों आम लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे।
जहां वह एक तय समय में वहां आसानी से जा सकेंगे। इसके साथ ही वह इनका विकास भी करेगा। मौजूदा समय में सरिस्का सहित देश के कई वन्यजीव अभयारण्यों में ऐसे पवित्र व प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद है, जहां लोगों की पहुंच आसान नहीं है। ऐसे में सरकार इन्हें खोलने का तैयारी में है।