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‘पहले लगता था काश मेरा भी बच्चा होता’: नसबंदी करवा चुके पूर्व नक्सली कैसे बन रहे हैं मां-बाप

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Jun 3, 2026


मंदा दोरपेड्डी की अब दो बेटियां हैं और वह ख़ुशहाल ज़िंदगी जी रही हैं

इमेज स्रोत, BHAGYASHREE RAUT

इमेज कैप्शन, मंदा दोरपेड्डी की अब दो बेटियां हैं और वो ख़ुशहाल ज़िंदगी जी रही हैं

“दूसरों के बच्चे को देखकर लगता था कि अगर मेरा बच्चा होता तो उसे घुमाती, उस पर बहुत प्यार बरसाती, उसको ख़ूब लाड़ करती.”

अपने आँगन में पेड़ के नीचे बैठीं मंदा दोरपेड्डी बता रही थीं कि माँ बनने की उनकी इच्छा कितनी तीव्र थी.

मंदा आत्मसमर्पित नक्सलवादी हैं और इस समय गढ़चिरौली की एक बस्ती में रहती हैं. उन्होंने चार कमरों का पक्का घर बनाया है और घर के पास की नर्सरी में मज़दूरी करके अपना गुज़ारा करती हैं.

सरेंडर के बाद उन्हें लगता था कि अब पति-पत्नी के रूप में जीने से आगे बढ़कर बच्चों वाला परिवार होना चाहिए. लेकिन मन में यह भी आता था कि शायद यह संभव नहीं होगा, क्योंकि उनके पति की नसबंदी नक्सल आंदोलन में रहते हुए हो चुकी थी.

लेकिन अब मंदा की माँ बनने की इच्छा पूरी हो गई है. उनकी दो बेटियाँ हैं और उनका हँसता-खेलता परिवार है. यह संभव हुआ गढ़चिरौली पुलिस के प्रोजेक्ट संजीवनी के तहत कृष्णा की नसबंदी को फिर से खोलने (रीओपन) की वजह से.

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