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उर्दू की मशहूर कहावत ‘राज़ खुल गया’ पाकिस्तान क्रिकेट पर बिल्कुल सटीक बैठती है क्योंकि जो बात पहले गुप्त थी, वह अब सामने आ गई है.
पाकिस्तान क्रिकेट में कप्तानी के खेल में एक और नाटकीय मोड़ आ गया है. यह तय हो गया है कि शान मसूद या सलमान अली आग़ा में से किसी को भी कप्तानी नहीं दी जाएगी, बल्कि बाबर आज़म को एक बार फिर टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया है.
बाबर आज़म वेस्ट इंडीज़ और इंग्लैंड के महत्वपूर्ण दौरे के लिए घोषित पाकिस्तान की 16 सदस्यीय टीम की कप्तानी करेंगे. बाबर आज़म तीसरी बार कप्तानी संभालेंगे.
पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान टेस्ट टीम की कप्तानी को लेकर काफ़ी चर्चा और अटकलें लगाई जा रही थीं.
एक तरफ़ यह कहा जा रहा था कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड शान मसूद पर भरोसा बनाए रखेगा, वहीं दूसरी तरफ़ सलमान अली आग़ा को नया टेस्ट कप्तान बनाए जाने की ख़बरें आ रही थीं.
ऐसी भी ख़बरें थीं कि टी-20 टीम के कप्तान सलमान अली आग़ा को टेस्ट टीम की कप्तानी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उस समय ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था.
पूर्व पाकिस्तानी टेस्ट क्रिकेटर बासित अली का ज़िक्र करना भी ज़रूरी है. उन्होंने कुछ दिन पहले अपने यूट्यूब चैनल पर दावा किया था कि फ़िलहाल कोई भी खिलाड़ी डर की वजह से टेस्ट टीम की कप्तानी संभालने को तैयार नहीं है.
उन्हें पता है कि वेस्ट इंडीज़ और इंग्लैंड के मुश्किल दौरे में हारने से उनके करियर पर असर पड़ेगा. लेकिन इस दौरे के बाद आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के अगले चरण में कोई भी खिलाड़ी कप्तानी संभालने के लिए तैयार होगा.
इस स्थिति में बाबर आज़म की कप्तानी आश्चर्यजनक है क्योंकि उनका इस कहानी में प्रवेश अंतिम क्षण में हुआ है. कप्तान के रूप में शान मसूद के निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद, जिसमें उन्होंने 16 टेस्ट मैचों में से 12 हारे और केवल 4 जीते, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनके भविष्य पर फैसला लेने में काफ़ी समय लिया. इसका कारण यह भी हो सकता है कि पीसीबी को कोई विकल्प नहीं मिल रहा था.
कुछ दिन पहले विश्वसनीय सूत्रों से यह पुष्टि हुई थी कि पीसीबी थिंकटैंक ने बाबर आज़म के नाम को कप्तानी के लिए प्रस्तावित किया है.
दूसरे शब्दों में कहें तो बाबर आज़म को कप्तानी का प्रस्ताव दिया गया था और उनकी सहमति के बाद अब इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई है.
बाबर आज़म ने कप्तानी स्वीकार कर ली है. लेकिन वे खुद भी भली-भांति जानते हैं कि यह उनके लिए कितनी बड़ी चुनौती है. उन्हें अतीत में दो बार कप्तानी छोड़ने के कड़वे अनुभव जरूर याद होंगे.
बाबर आज़म का टेस्ट कप्तान के तौर पर रिकॉर्ड भले ही अच्छा हो. लेकिन टेस्ट मैचों में उनकी बल्लेबाज़ी की फॉर्म उनके लिए एक और बड़ी चुनौती है.
दिसंबर 2022 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ शतक लगाने के बाद से 32 टेस्ट पारियों में वे एक भी शतक नहीं बना पाए हैं और इस दौरान उन्होंने सिर्फ 5 अर्धशतक ही बनाए हैं.
देखना बाकी है कि कप्तानी के दबाव में वो अपनी बल्लेबाज़ी से कितना न्याय कर पाएंगे? या फिर उनकी बल्लेबाज़ी को संभालने की चिंता उनकी कप्तानी पर असर डालेगी?
बाबर की कप्तानी कितना चलेगी?
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पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए कहा, “यह सोचना सही नहीं है कि सिर्फ़ कप्तान बदलने से सब कुछ ठीक हो जाएगा.”
“असल समस्या पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, उसके सदस्यों, चयनकर्ताओं और उसकी थिंकिंग कमेटी की है. थिंकिंग कमेटी ने अपना काम ठीक से नहीं किया है.”
“पिछले तीन सालों में जिस तरह से कप्तान बदले गए हैं, वह सबसे ख़राब है. 90 के दशक में भी कप्तान बदले गए थे. लेकिन तब हालात अलग थे. उस समय कुछ खिलाड़ियों पर मैच फ़िक्सिंग के लिए प्रतिबंध लगा था और कप्तानी भी बदली गई थी.”
राशिद लतीफ़ कहते हैं, “यह भी संभव है कि बाबर आज़म खुद कप्तान बनने के लिए बहुत उत्सुक हों. उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी फ़ॉर्म वापस पाई है.”
“उन्हें कप्तान बनाने का फैसला असल में अल्पकालिक है. क्रिकेट बोर्ड को दूसरा कप्तान मिलने में छह महीने से एक साल का समय लगेगा. जब से बोर्ड ने शाहीन अफ़रीदी, शादाब, शान मसूद और रिज़वान को कप्तानी सौंपी है, टीम का प्रदर्शन गिरता ही जा रहा है.”
क़रीबी दोस्त और दूरी
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एक समय बाबर आज़म और शाहीन अफ़रीदी के बीच गहरी दोस्ती थी. यही कारण है कि 2022 में जब बाबर आज़म को कप्तानी से हटाने की बात चल रही थी, तब शाहीन अफ़रीदी ने सोशल मीडिया पर खुलकर उनका समर्थन किया और साफ़ तौर पर लिखा कि ऐसा सोचना भी मना है.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनके इस पोस्ट पर कड़ी नाराज़गी जताई थी. लेकिन फिर एक समय ऐसा आया जब शाहीन अफ़रीदी को कप्तानी से हटाकर बाबर आज़म को दोबारा कप्तान बनाया गया.
बोर्ड ने एक बयान जारी किया जिसमें बाबर आज़म के प्रति शाहीन अफ़रीदी के समर्थन और सहयोग का ज़िक्र था.
इस पर शाहीन अफ़रीदी ने तीख़ी प्रतिक्रिया देते हुए ऐसे किसी भी बयान को नज़रअंदाज़ कर दिया, जिससे यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था कि इसी कप्तानी ने दोनों के बीच की क़रीबी को दूरियों में बदल दिया था.
कप्तानों के बदलते चेहरे
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पाकिस्तान क्रिकेट में कप्तानों का बदलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल ने कहा था कि पाकिस्तान क्रिकेट में कप्तान उतनी ही तेज़ी से बदलते हैं जितनी तेज़ी से लोग अपनी कमीज़ बदलते हैं.
पिछले तीन सालों में कप्तानों में लगातार बदलाव ने पाकिस्तान क्रिकेट को एक अजीब स्थिति में डाल दिया है.
बाबर आज़म को पहली बार 2019 में पाकिस्तान टीम का कप्तान बनाया गया था. लेकिन उन्होंने 2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद कप्तानी छोड़ने का फैसला किया.
उस समय पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें टेस्ट टीम का कप्तान बने रहने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. जिसके बाद शाहीन अफ़रीदी को टी-20 टीम का कप्तान और शान मसूद को टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया.
शाहीन शाह अफ़रीदी केवल एक ही सिरीज़ में कप्तानी कर पाए. न्यूजीलैंड में टी-20 सिरीज़ हारने के बाद उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया. यह एक चौंकाने वाला फ़ैसला था.
बाबर आज़म को मार्च 2024 में लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट का कप्तान फिर से नियुक्त किया गया था. लेकिन अक्तूबर 2024 में आईसीसी टी-20 विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ने की घोषणा कर दी.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी जगह मोहम्मद रिज़वान को वनडे क्रिकेट में कप्तान नियुक्त किया. साथ ही सलमान अली आगा को टी-20 क्रिकेट का कप्तान बनाया गया.
अक्तूबर 2025 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रिज़वान को वनडे कप्तानी से हटा दिया गया. उनकी जगह शाहीन अफ़रीदी को कप्तानी सौंपी गई जो वर्तमान में कप्तानी संभाल रहे हैं.
अगर हम मोहम्मद रिज़वान की वनडे कप्तानी पर गौर करें, तो उनके नेतृत्व में पाकिस्तान की वनडे टीम ने ऑस्ट्रेलिया, ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ़्रीका में वनडे सिरीज़ जीती.
उन्होंने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका के साथ तीन देशों की वनडे सिरीज़ का फ़ाइनल खेला. लेकिन फिर टीम आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के पहले दौर में ही बाहर हो गई और वेस्ट इंडीज़ में वनडे सिरीज़ हार गई. जिसके बाद उन्हें कप्तानी से हटाया गया.
मोहम्मद रिज़वान की जगह वनडे के कप्तान बने शाहीन अफ़रीदी ने अब तक दक्षिण अफ़्रीका, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ जीती है, जबकि उन्हें बांग्लादेश के ख़िलाफ़ हार का सामना करना पड़ा है.
इससे यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि किसी भी कप्तान को खुलकर और आत्मविश्वास से कप्तानी करने की अनुमति नहीं थी.
इमाम-उल-हक़ भी कप्तान बनने की ख्वाहिश रखते हैं.
पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज़ इमाम-उल-हक़ भी पाकिस्तानी टीम की कप्तानी करना चाहते हैं. उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह इच्छा ज़ाहिर की है. उनका कहना है कि अगर मुझे कप्तानी का प्रस्ताव दिया जाता है, तो मैं इसे ज़रूर स्वीकार करूंगा.
इमाम-उल-हक़ की इच्छा उनका अधिकार है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि 27 टेस्ट और 75 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बावजूद, वह टीम में स्थायी जगह नहीं बना पाए हैं.
शादाब ख़ान के लिए पैरवी
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पाकिस्तान क्रिकेट में कप्तानी की इस उठापटक में शादाब ख़ान का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है. उनके ससुर सकलैन मुश्ताक़ टीवी चैनलों पर उन्हें दोबारा कप्तान बनाने की बात करते नज़र आ रहे हैं.
वहीं दूसरी ओर उनके साथ खेलने वाले ऑलराउंडर इमाद वसीम भी उनके समर्थन में सामने आए हैं और कह रहे हैं कि टी-20 की कप्तानी शादाब ख़ान को सौंपने का यही सही समय है क्योंकि इस समय कप्तानी के लिए सिर्फ़ वही बचे हैं, उनके अलावा कोई और विकल्प नहीं है.
शादाब ख़ान के मामले में उन्हें 2023 के 50 ओवर के विश्व कप में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर कर दिया गया था.
फिर तीन साल बाद उन्हें अचानक इस साल ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू वनडे सिरीज़ के लिए चुना गया, जिसमें वह तीन मैचों में केवल दो विकेट ही ले पाए.
अगर हम टी-20 इंटरनेशनल में उनके प्रदर्शन को देखें तो इस साल आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के छह मैचों में वे केवल पांच विकेट ही ले सके, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कप्तान के रूप में सलमान अली आग़ा की जगह लेने का रास्ता उनके लिए तैयार किया जा रहा है.
हालांकि सलमान अली आग़ा अब तक 50 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी कर चुके हैं, जिनमें से 31 में जीत और 18 में हार मिली है.
यह कोई रहस्य नहीं है कि शादाब ख़ान पाकिस्तान के व्हाइट-बॉल क्रिकेट के मुख्य कोच माइक हेसन के क़रीबी हैं.
इसका एक कारण यह है कि दोनों पाकिस्तान सुपर लीग की टीम इस्लामाबाद यूनाइटेड में एक साथ खेल चुके हैं.
अगर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सलमान अली आग़ा को हटाकर शादाब ख़ान को टी-20 कप्तान बनाता है, तो इस फ़ैसले से किसी को भी हैरानी नहीं होनी चाहिए.
सिलेक्टर्स भी बदलते रहे हैं
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पाकिस्तान क्रिकेट में कप्तानों के साथ-साथ चयनकर्ता और मुख्य कोच भी लगातार बदलते रहते हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष जो भी बनता है, वह अपने भरोसेमंद लोगों को ही इन पदों पर नियुक्त करता है.
नज़म सेठी के कार्यकाल के दौरान पूर्व टेस्ट सलामी बल्लेबाज़ मोहम्मद वसीम को मुख्य चयनकर्ता के पद से हटा दिया गया और शाहिद अफ़रीदी को अंतरिम मुख्य चयनकर्ता बनाया गया.
महज़ एक महीने बाद शाहिद अफ़रीदी की जगह पूर्व टेस्ट क्रिकेटर हारून राशिद को नियुक्त किया गया.
नज़म सेठी के बाद, ज़का अशरफ़ बोर्ड के प्रमुख बने, जबकि इंज़माम-उल-हक़ भी कुछ महीनों के लिए मुख्य चयनकर्ता बने.
लेकिन उन पर हितों के टकराव के आरोप लगे, जिसके कारण उन्हें इस पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.
ज़का अशरफ़ के जाने के बाद मोहसिन नक़वी बोर्ड के अध्यक्ष बने.
मार्च 2024 में उनके कार्यकाल के दौरान गठित पहली चयन समिति में सात सदस्य थे: वहाब रियाज़, अब्दुल रज़्ज़ाक़, मोहम्मद यूसुफ़, असद शफ़ीक़ और बिलाल अफ़ज़ल, साथ ही हर फ़ॉर्मेट के कप्तान और कोच भी शामिल थे, लेकिन सितंबर में मोहम्मद यूसुफ़ ने समिति छोड़ दी.
अक्तूबर 2024 में एक नई चयन समिति का गठन किया गया. जिसमें आक़िब जावेद, अलीम डार, असद शफ़ीक, अज़हर अली और हसन चीमा शामिल थे.
पिछले साल अज़हर अली और इस साल अलीम डार ने भी चयन समिति से इस्तीफ़ा दे दिया था. हाल ही में सरफ़राज़ अहमद और मिस्बाह-उल-हक़ को चयन समिति में शामिल किया गया है.
अब इस चार सदस्यीय चयन समिति में आक़िब जावेद, असद शफ़ीक़, मिस्बाह-उल-हक़ और सरफ़राज़ अहमद शामिल हैं. लेकिन कोई मुख्य चयनकर्ता नहीं है.
तेज़ी से बदलते कोच
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पिछले कुछ सालों में मुख्य कोचों के चेहरे भी तेज़ी से बदल गए हैं.
वर्तमान में सरफ़राज अहमद पाकिस्तान टेस्ट टीम के चयनकर्ता होने के साथ-साथ मुख्य कोच भी हैं.
पाकिस्तान की लिमिटेड ओवर्स टीम के मुख्य कोच न्यूज़ीलैंड के माइक हेसन हैं. उन्होंने मई 2025 में मुख्य कोच का पद संभाला.
उनसे पहले गैरी कर्स्टन के दो साल के अनुबंध के बावजूद केवल छह महीने बाद इस्तीफ़ा देने के बाद आक़िब जावेद को अंतरिम मुख्य कोच बनाया गया था.
गैरी कर्स्टन के अलावा जेसन गिलेस्पी ने भी पाकिस्तान के रेड बॉल क्रिकेट के मुख्य कोच पद से इस्तीफ़ा दे दिया. दोनों ने उन पर अपने काम में अनुचित हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. गिलेस्पी ने इस मामले में आक़िब जावेद का नाम भी लिया था.
आक़िब जावेद ने रेड बॉल के अंतरिम मुख्य कोच के रूप में भी काम किया है. वर्तमान में वह हाई परफ़ॉर्मेंस सेंटर के निदेशक हैं और मौजूदा व्यवस्था में सबसे प्रभावशाली अधिकारी माने जाते हैं.
न्यूज़ीलैंड के ग्रांट ब्रैडबर्न भी कुछ समय के लिए पाकिस्तान के मुख्य कोच रहे थे. उन्होंने सकलैन मुश्ताक़ से यह पदभार संभाला था, जब मिकी आर्थर टीम निदेशक थे.
मिकी आर्थर और ब्रैडबर्न ऑस्ट्रेलिया दौरे पर नहीं गए थे, इसलिए उनकी जगह मोहम्मद हफ़ीज़ को टीम निदेशक नियुक्त किया गया था. हालांकि, उस दौरे के बाद हफ़ीज़ फिर कभी नज़र नहीं आए.
पूर्व ऑलराउंडर अज़हर महमूद ने पिछले साल दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ में पाकिस्तान टेस्ट टीम के अंतरिम मुख्य कोच के रूप में भी कार्य किया था.
यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि लगातार हो रहे इन बदलावों के बावजूद पाकिस्तान की टीम एक स्पष्ट रणनीति और कोचिंग के माध्यम से अच्छे परिणाम कैसे प्राप्त कर सकती है. फिर कप्तानों के आने-जाने ने टीम के प्रदर्शन को कितना प्रभावित किया है.
पाकिस्तान वर्तमान में आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में 7वें, वनडे रैंकिंग में 5वें और टी-20 रैंकिंग में 6वें स्थान पर है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.