डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के जलगांव सपकल गांव के रहने वाले भीकन जगन रोजेकर ने चार नाकाम कोशिशों और पैसों की भारी कमी के बाद भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और लगन से 5वें प्रयास UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 में ऑल इंडिया रैंक 812 हासिल की। रोजेकर का यह सफर दृढ़ संकल्प, माता-पिता के त्याग और अटूट लगन की एक मिसाल है।
मराठी स्कूल से दिल्ली की कोचिंग तक का सफर
भीकन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय जिला परिषद स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने जलगांव सपकाल के एक निजी स्कूल में पढ़ाई जारी रखी और फिर छत्रपति संभाजीनगर के एक कॉलेज से उन्होंने एग्रीकल्चर में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री ली। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।

पांचवे प्रयास में हासिल की सफलता
भीकन की सफलता का मार्ग आसान नहीं था। चार बार नाकामी पाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर असफलता को सीख की तरह लिया और अपनी कमियों को सुधार कर पांचवे प्रयास में सफलता हासिल की।
| प्रयास (Attempt) | वर्ष (Year) | परिणाम / स्थिति (Status) | सीख एवं अनुभव (Key Learnings) |
|---|---|---|---|
| पहला प्रयास | 2021 | प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में असफलता | परीक्षा पैटर्न को समझने और बेसिक मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। |
| दूसरा प्रयास | 2022 | प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में असफलता | माइक्रो-प्लानिंग और पिछले 10 वर्षों के क्वेश्चन पेपर्स का विश्लेषण शुरू किया। |
| तीसरा प्रयास | 2023 | प्रारंभिक/मुख्य परीक्षा चरण | दिल्ली में स्कॉलरशिप की मदद से गाइडेंस ली और आंसर राइटिंग सुधारी। |
| चौथा प्रयास | 2024 | मुख्य परीक्षा (Mains) दिया | ऑप्शनल सब्जेक्ट और निबंध लेखन (Essay) पर अपनी पकड़ और मजबूत की। |
| पांचवां प्रयास | 2025 | AIR 812 (सफल) | UPSC CSE में 812वीं रैंक के साथ-साथ IFoS मेंस व CAPF इंटरव्यू तक पहुँचे। |
UPSC तैयारी की स्ट्रेटेजी: माइक्रो-प्लानिंग और पिछले सालों के पेपर्स
अपनी तैयारी की स्ट्रेटेजी शेयर करते हुए, रोजेकर ने डिटेल्ड प्लानिंग, पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर्स को एनालाइज करने और सिलेबस को अच्छी तरह से कवर करने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कैंडिडेट्स को एग्जाम पैटर्न को समझने और बार-बार आने वाले टॉपिक्स को पहचानने के लिए कम से कम 10 साल के पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर्स सॉल्व करने की सलाह दी। उन्होंने एग्जाम से पहले सिलेबस पूरा करने, मॉक टेस्ट देने और पिछले सालों के सवालों की प्रैक्टिस करने के महत्व पर भी जोर दिया।

एग्रीकल्चर की डिग्री उनके प्लान B के तौर पर काम आई
रोजेकर ने कहा कि उनके परिवार वालों, खासकर उनके भाइयों ने उन्हें एक प्रोफेशनल डिग्री करने के लिए हिम्मत दी थी, जो कॉम्पिटिटिव परीक्षा की तैयारी में मनचाहे नतीजे न मिलने पर उन्हें नौकरी दिलाने में मदद कर सके। इसलिए उन्होंने एग्रीकल्चर में डिग्री ली, जिसे उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी के दौरान अपना बैकअप करियर ऑप्शन माना।

बचपन से ही कठिनाइयों का किया सामना
भीकन का बचपन बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता, जगन रोजेकर, दूसरे के खेतों और बाड़ों में मवेशियों की देखभाल और मजदूरी का काम करते थे, जबकि उनकी मां बेबीबाई रोजेकर, खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करती थीं। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, उनके माता-पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर नहीं छोड़ी।

सुबह सुबह शुरू होती थी कड़ी मेहनत
रोजेकर के पिता सुबह सुबह 4 बजे ही घर से निकल जाते थे ताकि दूसरों के खेतों में काम कर सकें और उनके मवेशियों की देखभाल कर सकें। घर से निकलने से पहले वह अपने बेटे को पढ़ाई करने के लिए जगा देते थे। उनके पिता दिन भर के खाने के साथ दूसरों के यहां काम करने चले जाते थे, जबकि उनकी मां भी सुबह जल्दी उठकर घर के सारे काम निपटाती थीं और फिर खेतों में मजदूरी करने निकल जाती थीं।
माता-पिता के बलिदान को नमन
भीकन के माता-पिता अनपढ़ हैं लेकिन उनके पिता ने दोनों भाईयों की पढ़ाई के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है। रोजेकर ने एक इंटरव्यू में बताया, ‘उनके पिता ने हम दोनों भाइयों की पढ़ाई के लिए बहुत कड़ी मेहनत की। उनका सपना था कि भले ही वे खुद शिक्षित नहीं हो पाए, लेकिन उनके बच्चे पढ़ें-लिखें और जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करें। कुछ समय पहले, एक दुर्घटना के बाद मेरी मां विकलांग हो गईं। इतनी कठिन परिस्थितियों में भी, मेरे पिता ने यह सुनिश्चित किया कि हमें किसी चीज की कमी न हो।’

भीकन की सफलता पर माता-पिता को गर्व
भीकन के पिता ने एक इंटरव्यू में अपने बेटे की कामयाबी पर खुशी जाहिर की और कही कि उन्हें उम्मीद है कि रोजेकर ईमानदारी और लगन से लोगों की सेवा करेंगे। उनके पिता ने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं। मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया है और मैं चाहता हूं कि मेरा बेटा भी उसी लगन से लोगों की सेवा करे।’
दोनों भाइयों ने परिवार को कराया गर्व
रोजेकर की कामयाबी से उनके परिवार को उन पर गर्व है। उनके छोटे भाई विकास रोजेकर इंडियन आर्मी में हैं। दोनों भाईयों ने देश की सेवा के लिए अलग-अलग रास्ते चुने हैं और अपनी उपलब्धियों से अपने परिवार और गांव के लिए गर्व की बात बताई है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने भीकन रोजेकर
भीकन रोजेकर ने दुनिया को दिखा दिया है कि शिक्षा से बड़ी कोई ताकत नहीं है। संघर्ष, दृढ़ संकल्प और निरंतरता के साथ किसी भी सपने को सच किया जा सकता है। वे आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं, जो उन्हें अपने माता-पिता की कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।