पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को बताया कि प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआइबी) के संरक्षण के लिए प्रजनन प्रोग्राम के तहत तीन नए चूजों को शामिल किया गया है, जिससे कैप्टिव ब्रीडिंग के चौथे वर्ष में अब तक पैदा हुए चूजों की कुल संख्या 26 हो गई है। इस मौसम में और भी चूजों के जन्म की उम्मीद है।
कैप्टिव ब्रीडिंग संरक्षण रणनीति है, जिसके तहत लुप्तप्राय या संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर चिड़ियाघरों, प्रयोगशालाओं या संरक्षण केंद्रों जैसे नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित रखकर प्रजनन कराया जाता है।भूपेंद्र यादव ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए पोस्ट किया, तीन नए चूजे में से एक जंगली अंडे और दो कैप्टिव अंडों से निकले हैं।
जीआइबी की कैप्टिव ब्रीडिंग के चौथे साल में अब तक 26 चूजे निकले हैं, जिनमें से 18 कृत्रिम गर्भाधान से, चार प्राकृतिक प्रजनन से और चार जंगल से इकट्ठा किए गए अंडों से निकले हैं। जंगली अंडों के बदले, राजस्थान में जंपस्टार्ट इंटरवेंशन के जरिये तीन चूज़े प्राकृतिक माहौल में निकले हैं। इसका मकसद शुरुआती जेनेटिक विविधता को बेहतर बनाना है।