ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में एकजुटता बढ़ती है, या उनका आपस में विलय होता है, तो इससे भाजपा का ‘पालिटिकल स्पेस’ (राजनीतिक आधार) बढ़ता है। फडणवीस ने कुछ दलों के कांग्रेस में विलय की चर्चा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस डूबता जहाज है। कोई भी उस पर चढ़ना पसंद नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकार्ड तोड़े जाने के अवसर पर देवेंद्र फडणवीस आज पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस पर उनसे शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के उस सुझाव के बारे में पूछा गया था, जिसमें राउत ने कांग्रेस से निकले दलों को पुनः कांग्रेस में जाने की सलाह दी थी।
फडणवीस ने राउत पर साधा निशाना
फडणवीस ने राउत का नाम लिए बगैर उन्हें बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब एक डूबता जहाज बन चुकी है। उसकी सवारी करना कोई पसंद नहीं करेगा। इसी कड़ी में फड़णवीस ने आगे कहा कि यदि सभी विपक्षी दल एकजुट भी जाएं तो उससे भाजपा का कोई नुकसान नहीं होता। उलटे उससे भाजपा का पालिटिकल स्पेस (राजनीतिक आधार) और बढ़ जाता है।
टीएमसी के विलय की अटकलें और राउत का सुझाव
बता दें कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की बुरी हार एवं तृणमूल के कांग्रेस में विलय की अटकलों के बीच संजय राउत ने सुझाव दिया है कि भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस से निकले क्षेत्रीय दलों को फिर से कांग्रेस के साथ आ जाना चाहिए और शरद पवार को इस प्रक्रिया में नेतृत्व करना चाहिए।
राउत ने आगे कहा था कि मजबूत कांग्रेस, अखंड कांग्रेस, एक प्रबल विकल्प के रूप में देश के भीतर खड़ी रहनी चाहिए। शरद पवार को इस संदर्भ में आगे आना चाहिए। अगल उन्होंने नेतृत्व किया, आगे आए, तो यह विचार बहुत आगे जाएगा। यानी राउत सीधा सुझाव दे रहे हैं कि महाराष्ट्र के क्षेत्रीय दल राकांपा (शरदचंद्र पवार) का कांग्रेस में विलय हो जाना चाहिए।
राउत की सलाह पर पवार की चुप्पी
हालांकि राउत के इस सलाह पर राकांपा (शरदचंद्र पवार) के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार तो अब तक स्वयं कुछ नहीं बोले हैं। लेकिन उनकी पुत्री सुप्रिया सुले ने कहा कि संजय राउत जी मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं। उन्होंने एक अच्छा सुझाव दिया है। पता नहीं होगा कि नहीं होगा।
सुप्रिया सुले के भतीजे एवं पार्टी के मुखर विधायक रोहित पवार ने भी कहा कि जब होगा, तब होगा। हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। लेकिन सबसे पहले जरूरी यह है कि सभी विपक्षी दल एक साथ आएं और मोदी सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़े रहें।
यहां यह बताना भी प्रासंगिक होगा कि स्वयं संजय राउत के दल के नौ लोकसभा सदस्यों में से भी सात के पार्टी छोड़कर शिंदे की शिवसेना में जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं। इसे ‘आपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है। हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे स्वयं इन चर्चाओं को अफवाह बता चुके हैं। लेकिन तृणमूल कांग्रेस में हार के बाद मची भगदड़ के बाद महाराष्ट्र में भी यह अफवाह सच में बदल जाए तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए।