डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। असम के CM हिमंता बिस्व सरमा और कांग्रस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी के बीच जुबानी जंग जारी है। इस बार मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सिंघवी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि उन्हें किसी से भी लोकतंत्र, सार्वजनिक चर्चा या शिष्टाचार पर सीख लेने की जरूरत नहीं है।
हिमंता का सिंघवी पर सीधा हमला
पोस्ट में सिंघवी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने आगे लिखा, ‘यहां असली मुद्दा एक महिला से जुड़ा है, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है; लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर दूसरे देशों के जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उसके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया है।
अदालत अक्रेगी न्याय: हिमंता
उन्होंने आगे लिखा, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि अदालतें देर-सवेर इस बात का संज्ञान जरूर लेंगी, और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल करके एक महिला के चरित्र को बदनाम करने के इस ढिठाई भरे काम के लिए दोषी को सजा जरूर मिलेगी।’
और हां, डॉ। सिंघवी, ऐसे मंच पर बोलना तो बहुत आसान है जहां मैं जवाब देने के लिए मौजूद ही न होऊं। इसे बहस नहीं कहते – यह तो बस एक निष्पक्ष संवाद से बचने का तरीका है, जिसकी वकालत आप खुद ही कर रहे थे। और मैं यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि यह तो अभी बस शुरुआत है, अंत नहीं।’
पवन खेड़ा की जमानत पर सिंघवी
वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत को ‘कानूनी मर्यादा की विजय’ करार दिया है।
उन्होंने इस कानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट से शीर्ष अदालत तक का यह घटनाक्रम साफ करता है कि सत्ता का दुरुपयोग केवल विपक्ष की आवाज दबाने और नेताओं को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है।
सिंघवी ने जोर देकर कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मानहानि का आरोप लगाया गया है, उसमें सभी तथ्य और दस्तावेज पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखे गए थे।