डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1971 में भारत में हालात तनावपूर्ण थे और पश्चिम बंगाल में तो और भी ज्यादा। 1970 के आम चुनावों के बाद पाकिस्तान में जो राजनीतिक संकट शुरू हुआ था वह भारत के साथ बड़े तनाव में बदलने वाला था और इसका नतीजा एक युद्ध और बांग्लादेश के जन्म के रूप में निकला।
पश्चिम बंगाल इस संघर्ष की अग्रिम पंक्ति पर था। हजारों पूर्वी पाकिस्तानी दमन से बचकर भाग रहे थे। तनाव इतना ज्यादा था कि 1 मार्च को पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने नेशनल असेंबली को निलंबित कर दिया।
जब पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए तैनात की गई थी सेना
फरवरी में जब तनाव बढ़ रहा था, तब पश्चिम बंगाल में छठे विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाने थे। ‘द हिंदू’ के अनुसार, हिंसा की आशंका को देखते हुए सेना ने चुनाव वाले इस राज्य में लगभग चार डिवीजन तैनात किए थे।
बता दें कि चार डिवीजन सेना द्वारा गलवान संकट से पहले लेह स्थित 14 कोर और कश्मीर स्थित 15 कोर में तैनात किए गए डिवीजनों की कुल संख्या के बराबर थे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने के लिए सेना को फरवरी में ही तैनात कर दिया गया था, जो कि 10 मार्च की चुनाव तारीख से काफी पहले का समय था।
‘द हिंदू’ की उसी रिपोर्ट के अनुसार, सैनिकों ने कोलकाता के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों के साथ-साथ आसनसोल और बर्दवान में भी गश्त शुरू कर दी थी।
‘द टेलीग्राफ’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 1971 में नक्सलबाड़ी विद्रोह को दबाने के लिए पश्चिम बंगाल में दो इन्फैंट्री डिवीजन और साथ ही सेना की विशिष्ट 50वीं पैराशूट ब्रिगेड जिसे ‘शत्रुजीत ब्रिगेड’ के नाम से भी जाना जाता है को भी तैनात किया गया था।
इस बार के क्या हैं हालात?
चीजें जितनी ज्यादा बदलती हैं उतनी ही वैसी की वैसी रहती हैं। इस बार भी इस चुनावी दौर में पश्चिम बंगाल से आई ज्यादातर रिपोर्टिंग का फोकस चुनावी हिंसा पर ही रहा है।
चुनाव आयोग (EC) ने चुनावी हिंसा को रोकने के लिए पूरे राज्य में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPFs) की करीब 2,400 कंपनियां तैनात की हैं। शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में करीब 2.4 लाख जवान तैनात किए गए हैं।
केंद्रीय पुलिस बलों की सबसे ज्यादा तैनाती उन इलाकों में होगी, जहां हिंसा का खतरा सबसे ज्यादा है। राज्य की राजधानी कोलकाता में इन बलों की सबसे ज्यादा तैनाती होगी, जहां 27,300 जवान तैनात होंगे। इसके बाद पूर्वी बर्दवान में 26,000 जवान और हुगली में 23,400 केंद्रीय पुलिस जवान तैनात होंगे।
यह ठीक वैसा ही है जैसा फरवरी 1971 में सेना की तैनाती के समय हुआ था। 2021 के चुनाव में भी चुनाव के बाद काफी हिंसा हुई थी और चुनाव आयोग ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए केंद्रीय बलों की 500 कंपनियां अपने पास रखेगा।