• Tue. Jul 14th, 2026

24×7 Live News

Apdin News

‘बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं’:युवा वकील की अभद्रता पर Cji सूर्यकांत ने तोड़ी चुप्पी, जानें और क्या कहा? – Children Often Do Things Like This Cji Surya Kant Breaks Silence On Young Lawyer’s Misconduct In Supreme Court

Byadmin

Jul 14, 2026


भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान हुई उस घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, जिसमें एक युवा वकील पर उनके खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और अदालत कक्ष के भीतर दस्तावेज फेंकने का आरोप लगा था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

क्या बोले सीजेआई सूर्यकांत?

ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन (AISAA) की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने बेहद संतुलित अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हमें संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। यह हम सभी का दायित्व है और हर किसी को इसे निभाना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक है और इसकी जिम्मेदारी केवल न्यायाधीशों या वकीलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।

पुराने मामलों के निपटारे के लिए क्या बड़ा फैसला लिया गया?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए नई रोस्टर व्यवस्था तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि मैंने जो नया रोस्टर तैयार किया है, उसमें तीन नहीं बल्कि चार विशेष पीठों का गठन किया गया है। इनमें दो पीठें दीवानी (सिविल) मामलों की सुनवाई करेंगी, जबकि दो पीठें आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों की सुनवाई करेंगी। इन चारों पीठों का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से सुप्रीम कोर्ट में लंबित पुराने मामलों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

कैसे होती है सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति?

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कॉलेजियम किसी भी नाम पर निर्णय लेने से पहले न्यायिक योग्यता, ईमानदारी, अनुभव और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन करता है।

उन्होंने कहा कि कॉलेजियम केवल व्यक्तिगत क्षमता ही नहीं देखता, बल्कि विभिन्न हाईकोर्टों का क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विविधता भी ध्यान में रखता है, ताकि देश का सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान की भावना और देश की विविधता का सही प्रतिनिधित्व कर सके।

किन न्यायाधीशों का हुआ सम्मान?

मुख्य न्यायाधीश यह बातें उस समारोह में कह रहे थे, जिसमें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना का सम्मान किया गया। इसके अलावा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल को भी सम्मानित किया गया।

ये भी पढ़ें: ‘वैकल्पिक नौकरी देनी चाहिए थी’: CRPF को घायल जवान को नौकरी से हटाना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सीजेआई की यात्रा को क्यों बताया प्रेरणादायक?

समारोह की शुरुआत करते हुए ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश सी. अग्रवाला ने कहा कि हिसार की जिला अदालतों से लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने तक न्यायमूर्ति सूर्यकांत का सफर प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने की मुख्य न्यायाधीश की सोच ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और न्यायपालिका (बेंच) तथा अधिवक्ताओं (बार) के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया है।

By admin