डिजिटल डेस्क, जगदलपुर। लगभग तीन दशकों बाद माओवादी हिंसा से मिली मुक्ति का जश्न बस्तर संभाग के अबूझमाड़ से लेकर बीजापुर-सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में मनाया गया। माओवाद के आतंक के साये में रहने वाले लगभग 90 गांवों में इस स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत की गूंज सुनाई दी। बच्चों के साथ ग्रामीण भी प्रभात फेरी में शामिल हुए।
अबूझमाड़ के कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा में तिरंगा लहराते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी, गर्व और नए विश्वास की झलक दिखाई दी।
गत 31 मार्च को क्षेत्र के माओवाद मुक्त होने के बाद यह पहला अवसर है, जब इन गांवों में राष्ट्रीय पर्व खुले तौर पर मनाया गया। लगभग 60 की आबादी वाले इस गांव में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाना ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा।
बीजापुर जिले के करका, कुएम, मदपाल, ताडपाला, मोसला, तुमीरगुंडा, केरपे आदि गांवों में माओवादियों की ओर से राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर समारोह आयोजित करना सख्त मनाही थी।
बस्तर संभाग के सात जिलों में 1840 से अधिक ग्राम पंचायतें और लगभग पांच हजार बसाहट हैं। माओवादियों के कब्जे वाले गांवों में राष्ट्रीय पर्व पर काला झंडा लहराने की खबरें अब बीते दिनों की कहानी बन चुकी है। बस्तर की तस्वीर बदल रही है और अब हर जगह तिरंगा लहराने लगा है।