डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026 पर सोमवार को संसद की मुहर लग गई। राज्यसभा ने इसे ध्वनिमत से पास कर दिया। लोकसभा इसे पांच अगस्त को ही पारित कर चुकी है।
इस कानून का मकसद ब्रिटिश कालीन 1891 के 135 वर्ष पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट को बदलना और वित्तीय सुबूतों से जुड़े कानूनी ढांचे को वर्तमान डिजिटल बैंकिंग के तौर-तरीकों के अनुरूप बनाना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों में देश में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, पेमेंट एग्रीगेटर, फिनटेक कंपनियों और देशभर में कार्यरत अन्य सेवा प्रदाताओं के आने से बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में काफी बदलाव आया है।
ये संस्थाएं आम लोगों की बैंकिंग और फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए जरूरी है कि जब भी और जहां भी जरूरत हो, उन्हें एक समान सुबूतों से जुड़ा ढांचा प्रदान किया जाए।
वित्त मंत्री ने बताया कि विधेयक की धारा-चार केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह अधिसूचना के जरिये इस अधिनियम को अन्य विनियमित वित्तीय संस्थाओं पर भी लागू कर सके, ताकि पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में सुबूतों से जुड़ा एक जैसा ढांचा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि विधेयक बैंकिंग रिकार्ड को जरूरत के हिसाब से फिजिकल या इलेक्ट्रानिक रूप में पेश करने की इजाजत देता है।
यह विधेयक कानूनी कार्यवाही में बैंकिंग रिकार्ड के इस्तेमाल के लिए एक स्पष्ट, सुरक्षित और पारदर्शी कानूनी ढांचा प्रदान कर लोगों का भरोसा मजबूत करता है, साथ ही ग्राहकों की निजता व गोपनीयता की पूरी सुरक्षा भी करता है।