इमेज स्रोत, Sanjeev Verma/Hindustan Times via Getty Images
पढ़ने का समय: 6 मिनट
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स समिट होगा. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस बैठक में शामिल होंगे.
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पीएम मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आएंगे.
इसे लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. समाचार एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से कहा कि तुग़लक रोड इलाक़े में क़रीब 500 सीसीटीवी लगाए गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने आयोजन स्थल के आस पास कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की है.
तैयारियों के बारे में बताते हुए स्पेशल दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा, “कई गणमान्य लोग दिल्ली आ रहे हैं. इनमें राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख, मंत्री, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य शामिल हैं. उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था भी की गई है, जिससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो.”
इससे पहले भी भारत साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता और बैठकों की मेज़बानी कर चुका है.
इसी साल मई में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी भारत ने की थी.
इस बार यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में फिर से तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता का दौर है.
इसके अलावा शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की अभी पुष्टि नहीं हुई है, जिसपर सभी की नज़रें हैं.
क्या है ब्रिक्स?
इमेज स्रोत, Per-Anders Pettersson/Getty Images
ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है.
ब्रिक्स अंग्रेज़ी के अक्षर B R I C S से बना वो शब्द है, जिसमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है. ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका.
ब्रिक्स में दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती 11 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं- रूस, चीन, भारत, ब्राज़ील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात.
ब्रिक्स2026 की वेबसाइट के अनुसार, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस ग्रुपिंग का पूर्ण सदस्य बना.
बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में इस ग्रुपिंग के पार्टनर देश बने.
कुछ जानकारों का कहना है कि ये देश साल 2050 तक विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे.
उनका मानना है कि चीन और भारत विनिर्माण उद्योग और सेवाओं के मामले में पूरी दुनिया के प्रमुख सप्लायर हो जाएंगे जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे.
ब्रिक्स को यह नाम किसने दिया?
इमेज स्रोत, MIKHAIL KLIMENTYEV/AFP via Getty Images
एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ’निल ने दुनिया के सबसे ताक़तवर निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स में काम करने के दौरान यह शब्द गढ़ा था. तब यह शब्द BRIC था.
जब 2010 में दक्षिण अफ़्रीका को भी इस समूह से जोड़ा गया तो यह BRICS हो गया.
ओ’निल ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था.
पहली बार 2006 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में जी-8 समूह के शिखर सम्मेलन के साथ ही ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन यानी ब्रिक के नेताओं ने पहली बार मुलाक़ात की थी.
सितंबर 2006 में जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इन देशों के विदेश मंत्रियों की औपचारिक बैठक हुई तो इस समूह को ब्रिक का नाम दिया गया.
ब्रिक्स को लेकर क्या है ट्रंप का रवैया?
इमेज स्रोत, DMITRY KOSTYUKOV/AFP via Getty Images
ब्रिक देशों की पहली शिखर स्तर की आधिकारिक बैठक 16 जून 2009 को रूस के येकाटेरिंगबर्ग में हुई.
इसके बाद 2010 में ब्रिक का शिखर सम्मेलन ब्राज़ील की राजधानी ब्रासिलिया में हुई. इसी वर्ष इससे दक्षिण अफ़्रीका के जुड़ने के साथ यह ब्रिक से ब्रिक्स बन गया.
दक्षिण अफ़्रीका अप्रैल 2011 में चीन के सान्या में आयोजित इस समूह के तीसरे शिखर सम्मेलन में पहली बार शामिल हुआ.
ब्रिक्स का गठन उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के अमीर देशों की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को चुनौती देने के लिए, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील देशों को एकजुट करने के मकसद से हुआ था.
बाद के सालों में कई देशों ने इसमें शामिल होने की रुचि दिखाई, तबसे ब्रिक्स में शामिल होने के लिए क़रीब 30 अन्य देशों ने इच्छा ज़ाहिर की.
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ब्रिक्स को लेकर नारज़गी भी देखने को मिली.
साल 2025 में हुई ब्रिक्स समिट के बाद ट्रंप ने सीधी धमकी देते हुए कहा था, “जो देश अमेरिका विरोधी नीतियों’ का साथ देंगे, अमेरिका उन देशों पर पहले से लगाए टैरिफ़ के अलावा और 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाएगा.”
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए ‘अनुमति देंऔर जारी रखें’ को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.
पोस्ट YouTube समाप्त
कितनी बड़ी है ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था?

ब्रिक्स का मुख्यालय चीन के शंघाई में है. ब्रिक्स के सम्मेलन हर साल आयोजित होते हैं और इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं.
जब इस समूह में चार देश थे तो हर पांचवें साल एक सदस्य देश इसका सम्मेलन आयोजित करता था.
ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता हर साल एक-एक कर ब्रिक्स के सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता करते हैं.
इस साल इस बैठक की मेजबानी भारत कर रहा है.
ब्रिक्स2026 की वेबसाइट के अनुसार, ब्रिक्स देशों की जनसंख्या दुनिया की आबादी का लगभग 49.5% है और इसका वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा लगभग 40% है और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी 26% है.
ब्रिक्स देश आर्थिक मुद्दों पर एक साथ काम करना चाहते हैं लेकिन इनमें से कुछ के बीच भारी राजनीतिक विवाद भी है. इन विवादों में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सबसे अहम है.
इसका सदस्य बनने के लिए कोई औपचारिक तरीक़ा नहीं है. सदस्य देश आपसी सहमति से ये फ़ैसला लेते हैं.
2020 तक नए सदस्यों को इस समूह से जोड़ने के प्रस्ताव पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन इसके बाद इस समूह को विस्तार देने पर चर्चा शुरू हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.