डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। UN के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की नई रिपोर्ट में भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। दरअसल, इस नई रिपोर्ट में लू को भारतीय कृषि श्रमिकों और चावल उत्पादन के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा गंगा और सिंधु नदी के आस-पास मौजूद कृषि क्षेत्रों में होने का अनुमान है। इसके कारण उत्पादन में 40% से अधिक की गिरावट आ सकती है।
विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर इस रिपोर्ट को जारी किया गया। इसमें, भारत में चावल और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन पर अत्यधिक गर्मी के असर का विश्लेषण किया गया है। इसमें भारत में 2022 में हुई अत्यधिक गर्मी की घटनाओं के उदाहरण दिए गए हैं, और यह बताया गया है कि उस साल अधिकतम और न्यूनतम तापमान में असामान्य बढ़ोतरी ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र सहित एक-तिहाई से ज्यादा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फसलों, फलों, सब्जियों, पशुधन और मुर्गी पालन को कैसे प्रभावित किया था।
2022 में जारी की गई रिपोर्ट का दिया हवाला
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, “वह साल पूरे भारत की कृषि उत्पादन प्रणालियों, खासकर उत्तरी और मध्य भारत में, उच्च तापमान और कम बारिश के मिले-जुले असर का एक बेहतरीन उदाहरण है।” यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब इस साल चार महीने (जून-सितंबर) के मॉनसून के मौसम में देश में ‘सामान्य से कम’ बारिश का अनुमान है।
WMO की माने तो लू को असामान्य रूप से गर्म मौसम की लंबी अवधि के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें कई दिनों से लेकर महीनों तक, दिन और रात दोनों का तापमान उस क्षेत्र के सामान्य औसत से ज्यादा हो जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि, पिछले आधी सदी में दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी की घटनाओं की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, और भविष्य में कृषि-खाद्य प्रणालियों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जोखिम और भी ज्यादा बढ़ने वाले हैं। WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, “अत्यधिक गर्मी अब उन स्थितियों को तेजी से परिभाषित कर रही है, जिनके तहत कृषि-खाद्य प्रणालियां काम करती हैं।”