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अमेरिकी सीनेट ने जंग से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के ख़िलाफ़ जंग रोकने या सैन्य कार्रवाई जारी रखने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति लेने का निर्देश दिया गया है.
ट्रंप के लिए इसे बड़े झटके के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि अमेरिकी सीनेट पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है.
मंगलवार को हुए मतदान में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया. माना जा रहा है कि ईरान युद्ध के प्रति डेमोक्रेट्स के साथ-साथ रिपब्लिकन सदस्यों में भी नाराज़गी है इसी वजह से ऐसा हुआ. ये प्रस्ताव 50-48 मतों से पास हुआ.
यही प्रस्ताव जून में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी पारित किया गया था, जहां चार रिपब्लिकन सांसदों ने सभी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसे 215-208 मतों से मंजूरी दी थी.
हालांकि, यह प्रस्ताव मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है क्योंकि कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होने के बावजूद इसे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने विचार के लिए नहीं भेजा जाएगा और इसका कानूनी रूप से कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होगा.
यह मतदान महत्वपूर्ण है क्योंकि 1973 का वॉर पावर्स रिज़ोल्यूशन लागू होने के बाद पहली बार कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का निर्देश देने वाला प्रस्ताव पारित किया है.
इसका पारित होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे व्हाइट हाउस पर ईरान युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ा है. युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हुई है और जनता के बीच युद्ध के विरोध में भी बढ़ोतरी देखी गई है.
हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम (सीज़फायर) के बाद अब ऐसी कोई सक्रिय सैन्य कार्रवाई नहीं है जिससे अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की आवश्यकता हो.
अधिकारी ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव केवल इसलिए पारित हो पाया क्योंकि दो रिपब्लिकन सीनेटर, मिच मैककॉनेल और डेव मैककॉर्मिक मतदान के समय अनुपस्थित थे.
चार रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, लिसा मर्कोव्स्की, सुसान कॉलिन्स और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.
डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन अपनी पार्टी के एकमात्र सदस्य थे जिन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.
यह मतदान नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शंस) से पहले रिपब्लिकन पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों का एक और संकेत माना जा रहा है.