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मोदी सरकार ने उठाए ये क़दम फिर भी क्यों नहीं थम रहीं चीनी की क़ीमतें

Byadmin

Aug 25, 2026


नरेंद्र मोदी और प्रल्हाद जोशी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में महंगी चीनी चुनावी मुद्दा बन सकती है

भारत दुनिया भर में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. भारत में चीनी की क़ीमतें पिछले दो महीनों में 40 फ़ीसदी से ज़्यादा बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं.

चीनी कंपनियों के शेयरों में सोमवार के इंट्राडे कारोबार में 12 फ़ीसदी तक की तेज़ी आई. यह तेज़ी इस उम्मीद के बीच आई कि शुगर सेक्टर के आउटलुक में सुधार होगा.

बजाज हिंदुस्तान शुगर, अवध शुगर एंड एनर्जी, डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज, धामपुर शुगर मिल्स, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज, मगध शुगर एंड एनर्जी, मवाना शुगर्स, पोन्नी शुगर्स (ईरोड), उगर शुगर वर्क्स और उत्तम शुगर मिल्स के शेयरों ने इंट्राडे कारोबार में अपने-अपने 52 हफ़्ते के उच्चतम स्तर को छुआ.

भारत ने क़रीब एक दशक में पहली बार 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ़्री आयात की अनुमति दी है. यानी भारत विदेशों से चीनी बिना आयात शुल्क के मंगवा रहा है ताकि क़ीमतों को नियंत्रित रखा जाए.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ राज्यों में चीनी की क़ीमतों में बढ़ोतरी 50 फ़ीसदी तक पहुँच गई है. उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और ओडिशा समेत आठ राज्यों में चीनी की क़ीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुँच गई है.

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