डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डार्क वेब पर सेंधमारी के मामले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक हैकर ने डार्क वेब पर कथित तौर पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और सेना से जुड़े 31 जीबी बेहद संवेदनशील डेटा को करीब 6.6 लाख में बेचने की खौफनाक पेशकश की है। तिरुवनंतपुरम की साइबर सुरक्षा फर्म ‘अलिबी ग्लोबल’ ने यह खुलासा किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 31 जीबी (GB) डेटा पिछले दो हफ्तों से डार्क वेब पर बिक्री के लिए विज्ञापित किया जा रहा है। इतना ही नहीं सबूत के तौर पर जारी किए गए कुछ सैंपल दस्तावेजों में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के हस्ताक्षर और मंजूरी से जुड़ी प्रतिबंधित तकनीकी जानकारी होने का दावा किया गया है।
दावे की सच्चाई की जांच में जुटा DRDO
इस दावा के सामने आने के बाद जब इस मामले में DRDO के सूत्रों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि वे इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच कर रहे हैं।
समझिए कैसे हुआ खुलासा
बता दें कि अलिबी ग्लोबल नामक कंपनी सरकारी एजेंसियों और महत्वपूर्ण संस्थानों को डार्क वेब मॉनिटरिंग की सेवाएं देती है। उनकी नियमित निगरानी के दौरान यह संवेदनशील डेटा नजर आया।
अलिबी ग्लोबल के तकनीकी निदेशक वी.के. भद्रन ने बताया कि मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने तुरंत इसकी सूचना ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (IB) को दे दी है। अब संबंधित सरकारी एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं कि डेटा वास्तव में कितना सही और संवेदनशील है।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह
मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात की गहराई से फोरेंसिक जांच होनी चाहिए कि क्या यह डेटा वास्तव में DRDO का है या किसी अन्य रक्षा संगठन से जुड़ा है।
गौरतलब है कि पिछले साल मार्च में भी ‘बाबुक लॉकर 2.0’ नाम के एक हैकिंग ग्रुप ने DRDO के सिस्टम में सेंध लगाने का दावा किया था। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों ने तब स्पष्ट किया था कि किसी भी सुरक्षा प्रणाली में घुसपैठ नहीं हुई थी, बल्कि फाइलें एक आईएएस अधिकारी के इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर से ली गई थीं।