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राम मंदिर चंदा चोरी:कांग्रेस ने 105 बार नकदी निकालने का लगाया आरोप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग – Ram Mandir Donation Theft Congress Jai Ram Ramesh Demands An Investigation Under Supreme Court Supervision

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Oct 27, 2026


राम मंदिर के चंदे और निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि चंदे के हिसाब-किताब से लेकर निर्माण कार्यों के ठेकों तक की सच्चाई सामने आ सके। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़े लोगों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है।

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर कमियां

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट को नवंबर 2020 में ही वित्तीय व्यवस्था और कामकाज में गड़बड़ियों को लेकर आगाह किया गया था। उनके मुताबिक, एक निजी ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ट्रस्ट में जिम्मेदारियां तय नहीं थीं और चंदे का हिसाब रखने की व्यवस्था भी कमजोर थी। रमेश के अनुसार, लेन-देन और डेटा की जांच के लिए दूसरे स्तर की व्यवस्था नहीं थी। हजारों कर्मचारियों के बावजूद मानव संसाधन विभाग नहीं था। बैंक खातों का मिलान करने और हिसाब-किताब संभालने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी थी। साथ ही, कंप्यूटर पर दर्ज आंकड़ों की सुरक्षा और जांच के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

छह साल बाद भी व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस का आरोप है कि ऑडिट फर्म ने हर लेन-देन के लिए स्पष्ट नियम बनाने और सोने-चांदी जैसी कीमती भेंट का पूरा रिकॉर्ड रखने की सलाह दी थी, लेकिन इन सुझावों पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ। रमेश ने कहा कि जब शुरुआत में ही कमियों की जानकारी मिल गई थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किए गए? उन्होंने दावा किया कि 2026 में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में भी चंदे की गिनती से जुड़ी गंभीर बातें सामने आईं। उनके मुताबिक, गिनती कक्ष से 105 बार बिना अनुमति नकदी निकाले जाने की बात सामने आई। आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर उनकी नजर रोकते थे। हालांकि, इन आरोपों और जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

निर्माण कार्यों में 40 फीसदी कमीशन का आरोप

मामला सिर्फ दान पेटियों तक सीमित नहीं है। मंदिर निर्माण परियोजना से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने कथित तौर पर ठेकों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। जयराम रमेश के मुताबिक, वर्मा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बताया था कि निर्माण ठेकों में 40 फीसदी तक कमीशन लिया जा रहा है। इसके अलावा, मजदूरों के रिकॉर्ड में फर्जी नाम दर्ज करने और निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ाकर दिखाने के आरोप भी लगाए गए। कांग्रेस का कहना है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय इंजीनियर को ही पद से हटा दिया गया। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।

कीमती दान की रसीद नहीं मिलने का दावा

जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि भक्तों की ओर से दी गई कई कीमती वस्तुओं को बिना आधिकारिक रसीद दिए स्वीकार किया गया। कांग्रेस का सवाल है कि जब मंदिर को सोना, चांदी और दूसरी बहुमूल्य चीजें दान में मिलती हैं, तो उनका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? रमेश ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर दान देने वाले लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी भेंट का हिसाब कैसे रखा जा रहा है। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आस्था से जुड़े इस मामले में जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।

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कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें

कांग्रेस ने मांग की है कि चंदे, जमीन के सौदों और निर्माण कार्यों से जुड़े सभी आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामला खत्म न किया जाए। पार्टी ने 2020 से अब तक मिले दान, कीमती वस्तुओं, ऑडिट रिपोर्ट, निर्माण ठेकों और उनसे जुड़े भुगतान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

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