राम मंदिर के चंदे और निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि चंदे के हिसाब-किताब से लेकर निर्माण कार्यों के ठेकों तक की सच्चाई सामने आ सके। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़े लोगों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है।
चंदा चोरी, आस्था धोखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट चुप्पी तोड़िए! देश जानना चाहता है कि चंदा चोर कौन हैं? भागीदार कौन-कौन हैं? सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं? जब चेतावनियाँ आती रहीं, तो चोरियाँ कैसे चलती रहीं? ज़िम्मेदार कौन है? बड़े चोरों को आज भी क्यों बचाया जा रहा है? 1. ऑडिट फ़र्म की सलाह रद्दी की टोकरी में क्यों? ट्रस्ट बनने (5 फ़रवरी 2020) के कुछ महीनों बाद, नवंबर 2020 में एक प्राइवेट ऑडिट फ़र्म ने ट्रस्ट को “इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट” पर सलाह दी थी। फ़र्म ने साफ़ लिखा: * मैनेजमेंट “बहुत ही अनप्रोफ़ेशनल” है; किसकी क्या ज़िम्मेदारी है, यह तय नहीं। * दान का कोई सिस्टमैटिक रिकॉर्ड नहीं। * लेन-देन और डेटा एंट्री की कोई दूसरी या तीसरी जाँच नहीं। * हज़ारों कर्मचारी, पर कोई HR डिपार्टमेंट नहीं। * बैंक रिकंसिलिएशन और अकाउंटिंग के लिए क्वालिफ़ाइड स्टाफ़ नहीं। * IT कंपनी के डेटा की सिक्योरिटी और वेरिफ़िकेशन का कोई इंतज़ाम नहीं। चेतावनी दी गई कि अनप्रोफ़ेशनल स्टाफ़ और ख़राब डेटा मैनेजमेंट से गलत जानकारी और गुमराह करने वाली रिपोर्टिंग होगी। सलाह दी गई कि हर लेन-देन, डेटा और स्टाफ़ के लिए SOP बने और गहनों जैसे दान के लिए सही स्टॉक रजिस्टर रखा जाए। छह साल बाद भी SOP लागू नहीं हुए। नतीजा यह हुआ कि 2026 में सरकार द्वारा लीपापोती के लिए बनाई गई SIT ने भी माना कि गिनती वाले कमरे से 105 बार नकदी निकाली गई, जबकि कर्मचारी कैमरों के सामने खड़े होकर उन्हें ढक देते थे। 2. इंजीनियर ने 40% कमीशन पर चेताया, उसे ही हटाया गया! मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने चंपत राय को बताया कि ठेकों में 40% कमीशन लिया जा रहा है, फ़र्ज़ी मज़दूर (घोस्ट वर्कर) दिखाए जा रहे हैं और सामान बढ़ा-चढ़ाकर बिलों में चढ़ाया जा रहा है। वर्मा का कहना है कि कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही हटा दिया गया। 3. बेशकीमती दान, पर रसीद तक नहीं! जाँच में दर्जनों ऐसी बेशकीमती चीज़ें मिलीं, जिनके लिए दान देने वालों को रसीद तक जारी नहीं की गई थी। जब ख़तरा 2020 में ही लिखकर बता दिया गया था, तो उस पर काम क्यों नहीं हुआ? शिकायत करने वाले को ही क्यों हटाया गया? श्रद्धालुओं के कीमती दान की रसीद तक क्यों नहीं काटी गई? चोर चोरी करते रहे और आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोग ‘मैं भी चौकीदार’ कहकर लगातार सोते रहे! यह कोई संयोग नहीं हो सकता! मतलब साफ़ है कि जिन्हें देव-द्रव्य की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी, यानी ट्रस्ट की निगरानी और चौकीदारी, सौंपी गई थी, उन्होंने जानबूझकर इस व्यवस्था को ऐसी हालत में क्यों रहने दिया, जिसमें चढ़ावे की रकम और कीमती दान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे? क्या यह सिर्फ़ लापरवाही थी या चोरों को संरक्षण दिया जा रहा था? किसे संरक्षण दिया गया और किन-किन बड़े लोगों की मिलीभगत या भागीदारी थी, इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। देश की जनता को आपकी सरकारी SIT की जाँच पर भरोसा नहीं है। जब चेतावनियों, शिकायतों और CCTV में सामने आई 105 घटनाओं के बावजूद बड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल कायम हैं, तो केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से पूरा मामला कैसे समाप्त हो सकता है? कांग्रेस की मांग स्पष्ट है: पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच हो। ऑडिट की चेतावनियों, ठेकों में कथित कमीशनखोरी, पूरी हेराफेरी और बेशकीमती दान का पूरा हिसाब सामने आए। छह साल से चल रही चोरी का पूरा आंकड़ा और ब्यौरा सामने आए। हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की जाँच हो और दोषियों को कानून के अनुसार सज़ा मिले। राम के नाम पर आए चढ़ावे का हिसाब देश मांग रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था किसी को भी जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देती।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 27, 2026
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर कमियां
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट को नवंबर 2020 में ही वित्तीय व्यवस्था और कामकाज में गड़बड़ियों को लेकर आगाह किया गया था। उनके मुताबिक, एक निजी ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ट्रस्ट में जिम्मेदारियां तय नहीं थीं और चंदे का हिसाब रखने की व्यवस्था भी कमजोर थी। रमेश के अनुसार, लेन-देन और डेटा की जांच के लिए दूसरे स्तर की व्यवस्था नहीं थी। हजारों कर्मचारियों के बावजूद मानव संसाधन विभाग नहीं था। बैंक खातों का मिलान करने और हिसाब-किताब संभालने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी थी। साथ ही, कंप्यूटर पर दर्ज आंकड़ों की सुरक्षा और जांच के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
छह साल बाद भी व्यवस्था पर सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि ऑडिट फर्म ने हर लेन-देन के लिए स्पष्ट नियम बनाने और सोने-चांदी जैसी कीमती भेंट का पूरा रिकॉर्ड रखने की सलाह दी थी, लेकिन इन सुझावों पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ। रमेश ने कहा कि जब शुरुआत में ही कमियों की जानकारी मिल गई थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किए गए? उन्होंने दावा किया कि 2026 में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में भी चंदे की गिनती से जुड़ी गंभीर बातें सामने आईं। उनके मुताबिक, गिनती कक्ष से 105 बार बिना अनुमति नकदी निकाले जाने की बात सामने आई। आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर उनकी नजर रोकते थे। हालांकि, इन आरोपों और जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
निर्माण कार्यों में 40 फीसदी कमीशन का आरोप
मामला सिर्फ दान पेटियों तक सीमित नहीं है। मंदिर निर्माण परियोजना से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने कथित तौर पर ठेकों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। जयराम रमेश के मुताबिक, वर्मा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बताया था कि निर्माण ठेकों में 40 फीसदी तक कमीशन लिया जा रहा है। इसके अलावा, मजदूरों के रिकॉर्ड में फर्जी नाम दर्ज करने और निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ाकर दिखाने के आरोप भी लगाए गए। कांग्रेस का कहना है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय इंजीनियर को ही पद से हटा दिया गया। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।
कीमती दान की रसीद नहीं मिलने का दावा
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि भक्तों की ओर से दी गई कई कीमती वस्तुओं को बिना आधिकारिक रसीद दिए स्वीकार किया गया। कांग्रेस का सवाल है कि जब मंदिर को सोना, चांदी और दूसरी बहुमूल्य चीजें दान में मिलती हैं, तो उनका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? रमेश ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर दान देने वाले लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी भेंट का हिसाब कैसे रखा जा रहा है। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आस्था से जुड़े इस मामले में जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।
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कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें
कांग्रेस ने मांग की है कि चंदे, जमीन के सौदों और निर्माण कार्यों से जुड़े सभी आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामला खत्म न किया जाए। पार्टी ने 2020 से अब तक मिले दान, कीमती वस्तुओं, ऑडिट रिपोर्ट, निर्माण ठेकों और उनसे जुड़े भुगतान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।