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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : ट्रस्टी को हटाने का क्या है नियम? नई टीम पर जल्द फैसला; 10 Points

Byadmin

Jul 5, 2026


माला दीक्षित, नई दिल्ली। राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की छह जुलाई को अहम बैठक होनी है। जिसमें चढ़ावा गणना विवाद मामले में एसआइटी की अंतरिम रिपोर्ट और वित्तवर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट व अन्य वित्तीय पहलुओं पर चर्च के अलावा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के त्यागपत्र पर विचार होगा।

आगे क्या कार्यवाही होगी

ऐसे में सभी जानना चाहते हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने जब त्यागपत्र दे ही दिया है, तो अब आगे क्या कार्यवाही होगी। लेकिन ट्रस्ट गठन की डीड में ही किसी ट्रस्टी को पद से हटाने और उत्तराधिकार की व्यापक व्यवस्था दी गई है। उसमें बताया गया है कि वो कौन सी परिस्थितियां होगीं जिसमें कोई ट्रस्टी पद से तत्काल प्रभाव से हट जाएगा। जिसमें एक परिस्थिति एक महीने का पूर्व नोटिस देकर पद से इस्तीफा देना भी शामिल है।

कारण बताओ नोटिस जारी या मौका

हालांकि, अगर बोर्ड ऑफ ट्रस्टी किसी ट्रस्टी को ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करने पर पद से हटाता है तो ऐसा दो तिहाई बहुमत से पास प्रस्ताव के जरिए किया जा सकता है लेकिन ऐसा करने से पहले उसे आरोप बताते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जवाब व सुनवाई का मौका दिया जाएगा।

सोमवार को होगा फैसला

सोमवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक इसीलिए अहम मानी जा रही है कि इसमें न सिर्फ चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार होगा, बल्कि मंदिर में प्रबंधन संबंधी आगामी व्यवस्थाओं पर भी विचार होगा। ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव हैं और सारी व्यवस्था और प्रबंधन उन्हीं के निर्देश पर चलता था। ऐसे में अगर वह पद से हट जाते हैं तो उनकी जगह किसे यह जिम्मेदारी सौंपी जाए मुद्दा बना हुआ है।

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किसे है वोट का अधिकारी?

ट्रस्ट डीड के मुताबिक, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में ट्रस्ट में 11 सदस्य हैं जिन्हें प्रस्ताव पर वोट देने का अधिकार है। इसमें ग्यारहवां सदस्य निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंन्द्र दास हैं जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि के तौर पर ट्रस्ट में शामिल हैं। इसके अलावा जो 10 सदस्य हैं उनमें पहले ट्रस्टी पूर्व अटार्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. परासरन हैं जो कि संस्थापक ट्रस्टी हैं और जीवनभर के लिए ट्रस्टी हैं।

कौन-कौन शामिल?

इसके अलावा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, परमानंद जी महाराज, स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ये ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं, विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्रा, डॉ अनिल मिश्रा जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है, चंपत राय महासचिव जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है, कृष्ण मोहन जो कामेश्वर चौपाल की जगह शामिल हुए थे।

क्या है ट्रस्ट का नियम?

ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, एक ट्रस्टी अनुसूचित जाति का होना जरूरी है। 11 ट्रस्टियों के अलावा केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के एक-एक वरिष्ठ अधिकारी पदेन ट्रस्टी है तथा अयोध्या के जिलाधिकारी भी पदेन ट्रस्टी हैं। साथ ही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा भी ट्रस्ट में शामिल हैं। लेकिन इनमें से बोर्ड ऑफ ट्रस्टी और वोट देने का अधिकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास को मिला कर सिर्फ 11 लोगों को ही है।

क्या कहती है ट्रस्ट डीड?

बैठक में उन्हीं के बहुमत से फैसला होगा कि क्या करना है क्या नहीं। इसमें से जिन दो लोगों ने इस्तीफा दिया है वे शामिल नहीं होंगे। ट्रस्ट डीड कहती है कि किसी भी बैठक का कोरम तभी पूरा होगा जबकि वोट देने का हक रखने वाले बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के 50 प्रतिशत ट्रस्टी उस बैठक में शामिल हों।

क्या है ट्रस्टियों की जिम्मेदारी? 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में अभी तक आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है जो कि चढ़ावे में आने वाली राशि की गणना का काम करते थे। लेकिन सवाल ये है कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों की भी कोई जिम्मेदारी बनती है?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एसआर सिंह कहते हैं कि इस मामले में दो चीजें हैं एक तो चोरी हुई है और दूसरी ट्रस्ट की ड्यूटी में लापरवाही हुई है। चोरी में कानून के मुताबिक, उन्हीं लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने अपराध किया है। जो लोग लापरवाही के जिम्मेदार है उन्हें पद से हटाया जा सकता है और ये बात पदेन सदस्यों पर भी लागू होती है चाहें उनके पास वोटिंग का अधिकार हो या न हो।

ट्रस्टियों की सांठगांठ

जस्टिस सिंह का कहना है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि पता चले कि इसमें ट्रस्टियों की सांठगांठ है कि नहीं अगर सांठगांठ साबित होती है तो कानून में वे भी उतने ही जिम्मेदार होंगे जितने की चोरी करने वाले हैं।

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