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राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट परिसर में पहुंचे

Byadmin

Oct 12, 2026


सुप्रीम कोर्ट
इमेज कैप्शन, इससे पहले मंडी हाउस के पास रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई
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पढ़ने का समय: 8 मिनट

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सोमवार को मार्च निकाल रहे विपक्षी नेता भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद पुलिस को छकाते हुए तिलक मार्ग से सुप्रीम कोर्ट के गेट बी तक पहुंच गए.

बीबीसी संवादताता दिगावल्ली पवन के अनुसार, राहुल गांधी की टीम ने बताया कि इंडिया ब्लॉक के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी.

इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने भगवान दास मार्ग से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ. इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई.

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पुलिस ने इंडिया गेट सर्कल पर उन्हें रुकने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद काफ़िला दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ा. फ़िलहाल, सभी नेता सुप्रीम कोर्ट के गेट बी के अंदर पहुंच गए हैं.

उधर शाम को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया.

वीडियो कैप्शन, दिल्ली में कांग्रेस सहित विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन

इमेज कैप्शन, विपक्षी पार्टियों के सुप्रीम कोर्ट तक प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं
राहुल गांधी

इमेज कैप्शन, सोमवार को इंडिया ब्लॉक और वामपंथी छात्र संगठनों के नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के लिए बस से पहुंचे

बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट के बीच क़रीब 2 किलोमीटर की दूरी है. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ याचिका दाखिल करने जा रहे हैं. वे ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

मार्च से पहले राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि यह अलग-अलग विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ एक ही प्रदर्शन है.

नेहा बोरा
इमेज कैप्शन, मार्च में शामिल होने से पहले विपक्ष के नेता बस में पहुंचे. साथ में नेहा बोरा भी हैं

ग़ौरतलब है कि इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का एलान किया था.

रायटर्स ने प्रोटेस्ट मार्च का वीडिया जारी किया है जिसमें भारी संख्या में लोग मंडी हाउस और सुप्रीम कोर्ट के बीच जमा हुए दिखे.

ढोल नगाड़ों के साथ भीड़ में कई लोग कांग्रेस का झंडा लिए हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट मार्च

इससे पहले, पैदल मार्च करते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी एक खुली गाड़ी पर दिखे, जिस पर विपक्ष के कई नेता मौजूद थे.

मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददात जुगल पुरोहित के अनुसार, कई दिनों से प्रदर्शनकारी कहीं इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सोमवार को कनॉट प्लेस के क़रीब बारखंभा के पास भारी संख्या में लोग पहुंचे.

उनके मुताबिक़, मार्च शुरू होने से पहले भारी संख्या में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता, प्रदर्शनकारी, छात्र और वकीलों समेत तमाम संगठनों के लोग मौजूद थे.

यहां से एक बस में राहुल गांधी समेत तमाम विपक्ष के बड़े नेता बैठकर सुप्रीम कोर्ट की ओर जाना शुरू किया. उनकी कोशिश है कि सुप्रीम कोर्ट में एक मेमोरेंडम सौंपा जाए. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और चुनाव प्रक्रिया में सुधार के बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च
इमेज कैप्शन, विपक्ष के मार्च में भारी संख्या में लोग इकट्ठा हुए दिखे

विपक्षी नेताओं ने क्या कहा

इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च में सोमवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी शमिल हुए.

उन्होंने कहा, “आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जारी रहेंगे. लोकतंत्र को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है. भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है. वे हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं.”

धरना स्थल बदलने के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, “अगर सरकार लोकतंत्र को मज़बूत करना चाहती है तो उसे विरोध प्रदर्शनों के लिए और जगहें उपलब्ध करानी चाहिए. प्रदर्शन स्थल बदल देने से सरकार की कथित गलतियां छिप नहीं सकतीं.”

वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक्स पर लिखा, “हम सिर्फ़ एक शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन इस पर पाबंदियां लगा दी गई हैं. हाल ही में मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, जिससे आम लोग प्रभावित हुए.”

“यह पहले से ही लगाया गया एक व्यापक प्रतिबंध था. अगर कोई तोड़फोड़ हुई होती तो हम समझ सकते थे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया है. दरअसल, आप डरे हुए हैं. संविधान हमें विरोध करने का अधिकार देता है.”

मार्च में शामिल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, “संविधान की रक्षा किसी भी राजनीति से ऊपर है. नागरिकों के वोट देने के अधिकार को उनसे छीन लिया गया है. 13 करोड़ लोग अपने वोट देने का अधिकार खो चुके हैं.”

लोग विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

प्रदर्शनकारी

इमेज कैप्शन, रविवार को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान एक महिला को हिरासत में लेती दिल्ली पुलिस

इस विवाद की जड़ देशभर में वोटर लिस्ट को अपडेट करने की एक व्यापक प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि यह मृत, दोहरे नाम वाले और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाने के लिए की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है.

अब तक मतदाता सूचियों से कम-से-कम 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं.

कई राज्यों में यह प्रक्रिया विवादों से घिरी रही है. हज़ार लोगों ने आरोप लगाया है कि उनके नाम ग़लती से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट को अपडेट करने के तरीके में ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में काम कर रहे हैं.

ज्ञानेश कुमार

इमेज कैप्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फ़ाइल फ़ोटो)

हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में ख़बर छपी कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर ’10 महीने में 14 बार आपत्ति’ दर्ज कराई.

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, “ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और ‘अनधिकृत, गैरकानूनी’ कदमों पर सवाल उठाए.”

इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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