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लंबे ब्रेक के बाद मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 48 घंटे में पहुंचेगा मुंबई; यूपी-बिहार में कब आएगी बारिश की फुहार

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Jun 22, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तपती और झुलसाती गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अगले 48 घंटों में इसके मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र को अपनी आगोश में लेने की पूरी उम्मीद है, जिससे लोगों को भीषण उमस से राहत मिलेगी। मानसून अब तक तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में दस्तक दे चुका है।

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पूर्वोत्तर में आफत की बारिश

एक तरफ जहां मानसून राहत लेकर आ रहा है, वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय बन गया है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सहित कई राज्यों में 28 जून तक भारी से अत्यंत भारी बारिश (20 सेंटीमीटर से अधिक) का अलर्ट जारी किया गया है। मेघालय में बाढ़ जैसे हालात की आशंका है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

कहीं राहत, कहीं अब भी आफत

मौसम का यह मिजाज देश को दो हिस्सों में बांट रहा है। जहां एक तरफ गोवा, कोंकण और बिहार में भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके अब भी भीषण ‘लू’ (हीट वेव) की चपेट में रहेंगे। मौसम का यह दोहरा रूप कहीं खुशियां तो कहीं चुनौतियां लेकर आया है।

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उम्मीदों की नई बोआई: खरीफ सीजन में अन्नदाताओं ने रच डाला नया कीर्तिमान

धरतीपुत्रों के पसीने और मेहनत ने एक बार फिर देश के खेतों में सुनहरे कल की नींव रख दी है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में चालू खरीफ सीजन के तहत कुल बोआई का रकबा 119.90 लाख हेक्टेयर को पार कर गया है।

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पिछले साल इसी अवधि में यह 117.95 लाख हेक्टेयर था। खेतों की यह हरियाली देश के खाद्य भंडार और किसानों के बुलंद हौसलों की गवाही दे रही है।

धान से लेकर मोटे अनाजों तक, खेतों में बिखरी खुशहाली

इस बार किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ‘श्री अन्न’ (मोटे अनाज) पर भी पूरा भरोसा जताया है। धान की बोआई पिछले साल के 8.09 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 12.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। वहीं, मूंग और उड़द जैसी दलहन फसलों का रकबा भी बढ़कर 7.21 लाख हेक्टेयर हो गया है।

स्वास्थ्य के लिए वरदान माने जाने वाले मोटे अनाजों (ज्वार, बाजरा, रागी) की बोआई 12.43 लाख हेक्टेयर और गन्ने की खेती 57.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल से काफी बेहतर है।

सरकार का संबल : बढ़े हुए एमएसपी से मिली ताकत

किसानों की इस अथक मेहनत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने एक बड़ा संबल दिया है।

विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बड़ी वृद्धि की गई है, जो लागत से कम से कम डेढ़ गुना अधिक है। इस फैसले से किसानों को उनकी लागत पर सबसे ज्यादा मुनाफा मूंग (61 प्रतिशत), बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और अरहर (54 प्रतिशत) पर मिलने की उम्मीद है।

सरकार का यह प्रयास न केवल फसलों के विविधीकरण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि हमारे अन्नदाताओं के जीवन में समृद्धि और सुरक्षा की नई सुबह भी ला रहा है।

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(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)

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