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लापता नाबालिग से जुड़ा मामला: एसीएस होम संजय प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक

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Jun 12, 2026


आईएएनएस, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को बड़ी राहत दी है। इसने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें संजय प्रसाद के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि फैसले की एक प्रति कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेजी जाए, ताकि भविष्य की नियुक्तियों के संबंध में उस पर विचार किया जा सके।

यह पूरा मामला जून 2025 में लापता हुई एक नाबालिग लड़की की बरामदगी से जुड़ी एक हैबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका से शुरू हुआ था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एकल जज जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए यह नोट किया कि लड़की को बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है।

हालांकि, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के कामकाज और वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। इसने विशेष रूप से 1995 बैच के आइएएस अधिकारी संजय प्रसाद के आचरण पर सवाल उठाए और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि वे इस फैसले की एक प्रमाणित प्रति कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव को भेजें।

कोर्ट का उद्देश्य था कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा भविष्य में अधिकारी की योग्यता के मूल्यांकन के दौरान इसे रिकार्ड में रखा जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जून के फैसले को चुनौती देते हुए संजय प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने संजय प्रसाद को याचिका दायर करने की अनुमति देते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले को दस सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, “हाईकोर्ट द्वारा विवादित आदेश के तहत जारी किए गए निर्देशों पर रोक रहेगी।” इस अंतरिम रोक के बाद संजय प्रसाद को फिलहाल बड़ी प्रशासनिक और कानूनी राहत मिल गई है।

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