डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ भले समाप्त हो गया हो, लेकिन अब विपक्षी दल इस मुद्दे को आधार बनाकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आज विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर और जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
इसकी वजह है कि विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बहुत बर्बरता की। उन पर आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।
प्रधानमंत्री से माफी की मांग
मिली जानकारी के अनुसार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी सोमवार को संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग करेगी।
पूरी बात को ऐसे समझिए कगि विपक्षी दलों को लगता है कि छात्र आंदोलन की तपिश के जरिए वे सरकार को संसद में बैकफुट पर ला सकते हैं। वे नहीं चाहते कि सरकार मानसून सत्र के बचे हुए तीन हफ्तों में अपने किसी और राजनीतिक एजेंडे को आसानी से आगे बढ़ा पाए।
राहुल गांधी के वे दो बड़े सवाल
इससे पहले लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सदन की कार्यवाही से पहले अपना रुख साफ कर दिया। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सीधे तौर पर दो कड़े सवाल पूछे। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के ये सवाल ही आज संसद में गूंजने वाला है।
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पैलेट गन की इजाजत किसने दी?
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि क्या गृह मंत्री के तौर पर आपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी? अगर नहीं, तो यह आदेश किसने दिया?
सादे कपड़ों में कौन थे लोग?
दूसरे और अहम सावल के तौर पर राहुल गांधी ने गृह मंत्री से पूछा कि प्रदर्शन के दौरान जो लोग सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से पीटते हुए दिखे, क्या वे पुलिसकर्मी थे या कोई और? उन्हें वहां तैनात करने की अनुमति किसने दी थी? कुल मिलाकर राहुल गांधी का तर्क है कि चूंकि दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अंडर आती है, इसलिए इसकी जवाबदेही गृह मंत्री की बनती है।
समझिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है?
बता दें कि विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार आज लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करेगी। यह नया और सख्त कानून पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए लाया जा रहा है।
अब समझिए क्या होगा इसमें?
इस प्रस्तावित कानून में मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने, दोषियों को कड़ी सजा देने और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित करने के कड़े प्रावधान शामिल हैं। यह बिल साल 2024 के पुराने कानून में संशोधन करके लाया जा रहा है।
सरकार के पलटवार की योजना क्या?
गौरतलब है कि चूंकि विपक्ष छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और पेपर लीक का मुद्दा जोर-शोर से उठाएगा, इसलिए सरकार भी पीछे हटने वाली नहीं है। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष की तरफ से भी कड़े सवाल उठाए जाएंगे और कांग्रेस के पुराने शासनकाल के दौरान हुए पेपर लीक तथा इमरजेंसी जैसे मुद्दों को उठाकर विपक्ष को जवाब दिया जाएगा।