एएनआई, नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने बुधवार को संसद को बताया कि सरकार ‘प्रहार’ रणनीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह भारत की पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी राष्ट्रीय नीति एवं रणनीति है, जो पूर्ण-सरकार और पूर्ण-समाज के समन्वित दृष्टिकोण के जरिये आतंकी गतिविधियों व कट्टरपंथ को रोकने और उनका जवाब देने के लिए राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचा प्रदान करती है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कुछ सांसदों के सवालों के लिखित जवाब में बताया कि इस वर्ष 23 फरवरी को शुरू की गई ‘प्रहार’ रणनीति कई मुख्य स्तंभों पर आधारित है।
जैसे- भारतीय नागरिकों व हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना; खतरे के अनुसार त्वरित और उचित जवाब देना; पूर्ण सरकार के दृष्टिकोण से तालमेल बिठाने के लिए आंतरिक क्षमताओं को एकजुट करना; खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून के शासन पर आधारित प्रक्रियाओं का पालन करना; कट्टरपंथ सहित आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों में कमी लाना; आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को आकार देना और पूर्ण समाज के दृष्टिकोण के जरिये रिकवरी व लचीलापन सुनिश्चित करना।
‘प्रहार’ के विशिष्ट उद्देश्यों और इस रणनीति को लागू करने की समयसीमा के बारे में राय ने कहा, “प्रहार’ सात-स्तंभीय रणनीति पर आधारित एक व्यापक, खुफिया-आधारित और सक्रिय ढांचे के माध्यम से आतंकवाद-रोधी सभी उद्देश्यों को पूरा करती है। यह भारत को बाद में जवाब देने वाले रुख से पहले से कार्रवाई करने के सिद्धांत की ओर ले जाती है।
इसके तहत मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के जरिये रीयल टाइम में खुफिया जानकारी साझा करने को औपचारिक रूप दिया जाता है, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सुरक्षित किया जाता है और राज्य एजेंसियों तथा नेशनल सिक्योरिटी गार्ड जैसे विशेष केंद्रीय बलों के बीच कमांड की एक त्वरित व समन्वित शृंखला तैनात की जाती है।”