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सबरीमाला केस में बड़ा सवाल, क्या अदालतें धार्मिक प्रथाओं की जाँच कर सकती हैं?

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May 30, 2026


सबरीमाला

इमेज स्रोत, R. SATISH BABU/AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी जो बड़ी बेंच का फ़ैसला आने तक लागू रहेगी.

इस साल 14 मई को सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने एक बहुत अहम मुद्दे पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

माना जा रहा है कि इस फ़ैसले का असर इस बात पर पड़ेगा कि भारत में लोग अपने धर्म का पालन किस तरह कर सकते हैं.

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंद‍िर से जुड़ा फ़ैसला द‍िया था. इस फ़ैसले के मुताब‍िक़, 10 से 50 साल की उम्र की स्‍त्र‍ियों को भी मंद‍िर में जाने की इजाज़त दी गई थी. मौजूदा मामला इसी फ़ैसले से जुड़ा है.

50 से ज़्यादा याचिकाओं ने साल 2018 के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इसमें सबरीमाला के मुख्य पुजारी, कई संगठन और व्यक्ति शामिल थे.

इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे में कई ऐसे सवाल हैं, जिन पर एक बड़ी पीठ को फ़ैसला लेना होगा. इसलिए यह मामला नौ जजों की एक संव‍िधान पीठ को सौंप दिया गया.

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