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सीकर के दो ‘सर’ और नीट पेपर लीक का नेटवर्क… कैसे होता था सौदा, कैसे खुली पोल? पूरी कहानी

Byadmin

May 15, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET 2026 परीक्षा पेपर लीक मामले में राजस्थान के सीकर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों एक ही परिवार के सदस्य हैं और मुख्य संदिग्ध माने जा रहे हैं। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में दिनेश बीवाल, उनके भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल के बड़े बेटे विकास शामिल हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने असली प्रश्न पत्र से काफी मिलता-जुलता ‘गेस पेपर’ खरीदा और इसे सीकर के कोचिंग केंद्रों में बेच दिया, जिससे यह बड़े पैमाने पर फैल गया। इस घोटाले ने देशभर के 23 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

बड़े नेटवर्क का खुलासा

तीन मुख्य गिरफ्तारियों के बावजूद जांच एजेंसियां मान रही हैं कि राजस्थान में एक विशाल और अदृश्य नेटवर्क सक्रिय है। कई लोगों से पूछताछ की गई है, कुछ को हिरासत में लिया गया है और कई अभी भी जांच की जद में हैं। सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क देश के सबसे बड़े पेपर लीक घोटालों में से एक से जुड़ा हो सकता है।

राकेश सर का ‘RK कंसल्टेंसी’

इस नेटवर्क के प्रमुख चेहरों में सीकर के पिपराली रोड पर ‘RK कंसल्टेंसी’ चलाने वाले राकेश कुमार मंडावरिया शामिल हैं। नवोदय विद्यालय के पूर्व छात्र और ‘राकेश सर’ के नाम से मशहूर मंडावरिया करियर गाइडेंस और पेपर सॉल्विंग से जुड़े काम करते थे। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने बीवाल भाइयों से यह गेस पेपर 15 लाख रुपये में खरीदा और फिर इसे छात्रों व कोचिंग संस्थानों को 3 से 5 लाख रुपये प्रति पेपर के हिसाब से बेचा।पेपर लीक सामने आने के बाद राकेश सर गायब हो गए। बाद में उन्हें उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। उनकी दुकान का शटर बंद मिला, हालांकि एयर कंडीशनिंग चालू थी। राजस्थान पुलिस ने उनके स्टाफ को हिरासत में लिया और कंप्यूटर तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए।

गेस पेपर कैसे फैला?

30 अप्रैल से 2 मई के बीच, यानी परीक्षा से ठीक एक दिन पहले सीकर में यह गेस पेपर तेजी से सर्कुलेट होने लगा। कुछ छात्रों ने इसे मात्र 15 हजार रुपये में या मुफ्त में ही शेयर कर दिया। एक MBBS छात्र ने इसे अपने दोस्त के साथ शेयर किया, जिसके पिता सीकर में हॉस्टल चलाते हैं। हॉस्टल मालिक ने ही इस लीक का पर्दाफाश किया।

‘भाई सर’ और फर्जी कोचिंग संस्थान

मामले में एक और संदिग्ध सत्यनारायण चौधरी उर्फ ‘भाई सर’ सामने आए हैं। वे केमिस्ट्री के टीचर थे और ‘डीप करियर इंस्टीट्यूट’ नाम से कोचिंग चलाते थे, जो मात्र कुछ महीनों तक ही चला। संस्थान के एक पोस्टर पर बीवाल परिवार के तीन छात्राओं पलक, सानिया और गुंजन बीवाल की तस्वीरें छपी हुई थीं, जिन्होंने NEET पास किया है। पड़ोसियों के अनुसार, चौधरी बाद में नागौर चले गए। वे ‘द मास्टर स्ट्रोक’ नाम से गेस पेपर तैयार करते थे, जिनके प्रश्न अक्सर असली परीक्षाओं से मेल खाते थे। पूछताछ के बाद वे भी लापता बताए जा रहे हैं।

कहां तक पहुंची जांच?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब 150 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और 40 लोगों को हिरासत में लिया गया। कई छात्रों को जमानत पर छोड़ दिया गया है, लेकिन उन्हें जरूरत पड़ने पर दोबारा बुलाया जा सकता है। राजस्थान पुलिस ने पेपर लीक की पुष्टि कर मामले को CBI को सौंप दिया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘मंडावरिया, चौधरी और अन्य लोगों की जांच जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले की मुख्य कड़ियां सामने आएंगी।’विशेष अभियान समूह (SOG) ने कई आरोपियों को CBI को सौंपा है। पूरे मामले की गहन जांच चल रही है, जिससे आगे और बड़े खुलासे की उम्मीद है।

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