डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार ने नियंत्रण रेखा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में सौर, पवन और हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा की किसी भी नई परियोजना पर रोक लगा दी है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों, विशेष रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के इंजीनियरों, कर्मचारियों एवं श्रमिकों को केंद्र सरकार की अनुमति के बिना नियुक्त करने पर भी रोक लगाई गई है।
गृह मंत्रालय ने नियंत्रण रेखा (एलओसी), वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) या अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे वाले क्षेत्रों को “संवेदनशील क्षेत्र” घोषित कर दिया है। इस दायरे में सभी सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना जरूरी होगा।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर तक के क्षेत्र में परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय से अलग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में पांच जून को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था और हाल ही में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है।
इन दिशा-निर्देशों के तहत जिन परियोजनाओं के लिए दोबारा आवेदन करना होगा, उन पर भी ये प्रविधान लागू होंगे। एक से 50 किलोमीटर के दायरे में प्रस्तावित परियोजनाओं को सुरक्षा मंजूरी देने या एक से 20 किलोमीटर के दायरे में अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने पर गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय प्रत्येक मामले के आधार पर फैसला करेगा।
आवेदक गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी समेत केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना किसी विदेशी कंपनी को जमीन हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने से संबंधित आवेदनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर ये दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसी परियोजनाओं के राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)