जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक अपील ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। उन्होंने लोगों से कहा कि एक साल तक सोना खरीदने से बचें, विदेश यात्राएं टालें और जहां संभव हो, वर्क फ्राम होम अपनाएं।
पहली नजर में यह सामान्य सलाह लग सकती है, लेकिन इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का बड़ा फारेक्स लॉजिक छिपा है। दरअसल भारत में बिकने वाला ज्यादातर सोना विदेशों से आता है और हर बार जब भारत सोना खरीदता है तो उसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है।
यानी भारत जितना ज्यादा सोना खरीदेगा, उतने ज्यादा डॉलर देश की तिजोरी से निकलकर विदेश चले जाएंगे। यही पूरा फारेक्स लाजिक है, जिसने सरकार की बढ़ा दी है।
सिर्फ सोना खरीदने में उड़ गए 72 अरब डॉलरवित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यानी लगभग छह अरब डॉलर प्रति माह। यह पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत ज्यादा है। यह रकम इतनी बड़ी है कि कई देशों की पूरी अर्थव्यवस्था भी इससे छोटी है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का खरीदार है। भारत का कुल आयात बिल वित्त वर्ष 2026 में 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें सिर्फ चार चीजों ने सबसे ज्यादा पैसा खाया।
- कच्चा तेल – 134.7 अरब डॉलर
- सोना – 72 अरब डॉलर
- खाद्य तेल – 19.5 अरब डॉलर
- उर्वरक – 14.5 अरब डॉलर
यानि सिर्फ इन चार चीजों पर 240 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो गए। इन चार चीजों का हिस्सा भारत के कुल आयात का 31.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अकेले सोना कुल आयात का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा बन गया। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से इन चीजों के इस्तेमाल में कटौती की अपील की।
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भारत की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस समय करीब 690.69 अरब डॉलर हैं। फरवरी में यह आंकड़ा 728 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन वैश्विक तनाव बढ़ने के बाद अप्रैल तक फिर गिरकर करीब 691 अरब डॉलर पर आ गया।
इसी बीच आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक भारत का चालू खाता घाटा यानी सीएडी बढ़कर 84.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सरल भाषा में समझें तो देश से डॉलर ज्यादा बाहर जा रहे हैं और अंदर कम आ रहे हैं। ऐसे में अगर सोने की खरीद नहीं रुकी तो विदेशी मुद्रा भंडार पर और दबाव बढ़ सकता है।
अगर लोगों ने सोना खरीदना कम कर दिया तो क्या होगा?यहीं पीएम मोदी की अपील का असली गणित छिपा है। अगर भारत में सिर्फ एक साल के लिए सोने की खरीद कम हो जाए तो देश अरबों डॉलर बचा सकता है। अगर गोल्ड इम्पोर्ट में 30 से 40 प्रतिशत गिरावट आती है तो भारत 20 से 25 अरब डॉलर बचा सकता है। अगर खरीद आधी रह जाए तो करीब 36 अरब डॉलर बच सकते हैं।
यानी सिर्फ एक साल सोना कम खरीदने से भारत अपने अनुमानित चालू खाता घाटे का लगभग आधा बोझ कम कर सकता है। यही वजह है कि सरकार लोगों से अभी संयम बरतने की अपील कर रही है।
ईरान युद्ध ने क्यों बढ़ा दी भारत की टेंशन?
ईरान से जुड़े युद्ध और तनाव ने पूरी दुनिया में तेल बाजार को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम तेल मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में महंगा तेल सीधे भारत की जेब पर हमला है।
दूसरी तरफ युद्ध के समय लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। जैसे ही तनाव बढ़ता है, लोग तेजी से सोना खरीदने लगते हैं। इससे सोने की कीमतें और आयात दोनों बढ़ जाते हैं। यानी भारत पर दोहरी मार पड़ती है, महंगा तेल और महंगा सोना। हर बार जब सोना आयात होता है, तब भारतीय कंपनियां बाजार से डॉलर खरीदती हैं।
डॉलर की मांग बढ़ते ही रुपया कमजोर होने लगता है। लेकिन अगर सोने की खरीद कुछ समय के लिए रुक जाए तो डॉलर की मांग घटेगी, रुपये पर दबाव कम होगा और आरबीआइ के विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिलेगी।
आखिर सरकार चाहती क्या है?
सरकार लोगों को निवेश रोकने के लिए नहीं कह रही, बल्कि डॉलर बचाने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग गहनों और फिजिकल गोल्ड की जगह एसआइपी और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प चुनें तो पैसा देश के भीतर ही काम करेगा और डॉलर बाहर नहीं जाएगा।