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स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ किसी से छीना नहीं जा सकता’

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Jul 27, 2026


20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों के जवानों ने लाठियों का इस्तेमाल किया

इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images

इमेज कैप्शन, 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों के जवानों ने लाठियों का इस्तेमाल किया

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और केवल आंदोलन करने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस बल के अत्यधिक इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली याचिकाओं का उल्लेख किए जाने के दौरान ये टिप्पणियां कीं.

क़ानूनी मामलों से जुड़ी ख़बरें देने वाली वेबसाइट लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक़, अदालत ने आगे कहा कि पुलिस ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा, “शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत पूरी तरह सुनिश्चित है.”

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