जेएनएन, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने करीब 15 साल पुराने एक मामले में सास मनकी बाई को बहू पंचोबाई की आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार की एकल पीठ ने बेमेतरा के अतिरिक्त सत्र न्यायालय के 26 नवंबर 2011 के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त कर दिया है।
मामला बेमेतरा जिले का है। 20 दिसंबर 2010 को पंचोबाई ने ससुराल में खुद को आग लगा ली थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
अभियोजन का आरोप था कि घटना के दिन सास ने उसे घर के भीतर प्रवेश नहीं दिया और बाहर बैठाए रखा, जिससे क्षुब्ध होकर उसने यह कदम उठाया। बेमेतरा के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने सास को अलग-अलग धाराओं में तीन और एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।
मामले के अन्य सह-आरोपितों को बरी कर दिया गया था। निर्णय के खिलाफ मनकी बाई ने उसी वर्ष हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि इसमें काफी विसंगतियां थीं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बहू को घर के भीतर प्रवेश न देने या घर के बाहर बैठाए रखने मात्र से अपराध साबित नहीं होता।
आत्महत्या के लिए उकसावे के लिए अभियोजन को स्पष्ट आपराधिक नीयत और ऐसा निकटवर्ती कृत्य साबित करना होता है, जिससे लगे कि मृतका को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया था।
केवल घरेलू विवाद या सामान्य प्रताड़ना उकसावा नहीं है। इस आधार पर मनकी बाई को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।