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2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा इस बार का परिसीमन, यूपी-बंगाल से केरल-तमिलनाडु में बढ़ेंगी 50 सीटें

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Apr 17, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) से संसद का तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र के हंगामेदार होने की उम्मीद है क्योंकि इस दौरान तीन बिल पेश किए जाएंगे जो भारत के चुनावी ढांचे और रिप्रजेंटेशन सिस्टम को नया रूप दे सकते हैं।

इन तीन बिलों में संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं। इन विधेयकों को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। विपक्ष का आरोप है कि महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े कानूनों के पास होने के बाद दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में कमी आ जाएगी। वहीं, सरकार ने भी पूरी तरह से कमर कस ली है।

किस हिसाब से किया जाएगा परिसीमन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे का आधार सिर्फ 2011 की जनगणना नहीं होगी। इसके बजाय परिसीमन एक ऐसे फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा, जिसमें सभी राज्यों की हिस्सेदारी को आनुपातिक रूप से और 50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।

रिपोर्ट में बताया गया, “सिर्फ इतना ही नहीं सभी राज्यों को फायदा होगा। उन्हें 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद मिलने वाले प्रतिनिधित्व से भी ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा।”

उदाहरण के तौर पर अगर तमिलनाडु राज्य को ही ले लें तो प्रस्तावित योजना के तहत इसकी मौजूदा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। अगर 2011 की जनगणना के आधार पर इसकी सीटों का बंटवारा किया जाता तो ये 49 होतीं।

किस राज्य में कितनी बढ़ जाएंगी सीटें

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अगर इसे 2011 की आबादी को आधार बनाकर किया जाता है तो दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व हिंदी बेल्ट के मुकाबले लगभग 4% कम हो सकता है। अधिकतम 850 सीटों का प्रावधान किया गया है, ठीक वैसे ही जैसे अभी 550 सीटों की ऊपरी सीमा है, जबकि सदन की असल संख्या 543 है। बता दें कि ये सिर्फ अनुमान है।

परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ वोट करेगा विपक्ष

विपक्षी पार्टियों ने कहा कि वे परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन के खिलाफ वोट करेंगी। उन्होंने इसे एक खतरनाक कदम बताया, जिससे दक्षिण, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और अन्य छोटे राज्यों का हिस्सा कम हो जाएगा।

वहीं राहुल गांधी ने इसे एक “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” करार दिया। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार 2023 में सर्वसम्मति से पारित अनुच्छेद 334(a) का पालन करते हुए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को तत्काल लागू करे।

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