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Bengal Election Result 2026:बंग फतह की जंग में क्यों और कैसे आगे निकली भाजपा – Bengal Election Result 2026 Key Factors For The Bjp’s Strengthened Position In 2026, Blog News In Hindi

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May 4, 2026


प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह दोनों ही चुनावी प्रचार में अंग-बंग-कलिंग का जिक्र करते हुए बंग जीतने की बात करते थे। आखिर यह अंग-बंग-कलिंग है क्या? पहले इसे समझते हैं। अंग-बंग-कलिंग : यह प्राचीन भारत के पूर्वी हिस्से के तीन ऐतिहासिक और समृद्ध साम्राज्य थे। जिसमें अंग (बिहार), बंग (बंगाल) और कलिंग (ओडिशा) शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह ने इसे भारत की ऐतिहासिक समृद्धि के तीन मजबूत स्तंभ बताते हुए चुनावी प्रचार किया। वर्तमान चुनावी परिदृश्य में, यह अंग-बंग-कलिंग शब्द पूर्वी भारत के विकास और भाजपा के लिए प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरे हैं।


भाजपा चुनावी जंग में क्यों और कैसे जीत गई बंग?

आखिर, तृणमूल कांग्रेस से कहां और क्या कमी रह गई या क्यों व कैसे चूक गई जंग में बंग! यह जानने के पहले चुनावी जंग में बंग विजय के लिए खासकर भाजपा की गई तैयारियों पर पहले एक नजर डालते हैं। यूपी और असम को झोली में डाल चुके सुनील बंसल को भाजपा, बंगाल का दायित्व दी। साथ में भूपेंद्र यादव और विप्लव देव जैसे सहयोगी उनकी मदद के लिए। यूपी-बिहार के पूर्व मंत्रियों सुरेश राणा और मंगल पांडेय सरीखे नेताओं को भी इस चुनावी जंग में उतार दी। अमित मालवीय तो शुरू से ही दायित्व में थे। तृणमूल कांग्रेस की भाषा में जिन्हें बहिरागत कहा जाता है।

 


भाजपा के इन नेताओं में कुछ तो व्रषों से तो कुछ महीनों से बंगाल में डेरा डाले रहे। कुछ ने तो किराए पर फ्लैट भी ले लिया और कुछ आते जाते थे और होटलों में ठहरते थे। कुछ फ्लैट किराए पर लेकर आलीशान गेस्ट हाउस भी बनाए गए, बाहर से आने वाले नेताओं को ठहरने के लिए। पूरे प्रदेश के कोने-कोने में यह नेता चुनावी तैयारी के तहत राजनीतिक जमीन तैयार किए। लगातार अंदुरुनी बैठक की गई ताकि बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत किया जा सके जो कि तृणमूल कांग्रेस से तृणमूल स्तर पर मुकाबला कर सकें।



प्रधानमंत्री मोदी 14 मार्च 2026 को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भाजपा की परिवर्तन यात्रा के समापन पर एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए सौगातों की झड़ी लगा दिए। अगले ही दिन 15 मार्च 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनावों की घोषणा कर दी।  भाजपा की तैयारियों पर सरसरी निगाह के बाद चुनाव आयोग की तैयारियों पर नजर डालते हैं। 27 अक्टूबर 2025 को दूसरे चरण के अंतर्गत पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की घोषणा हुई थी। बंगाल में एसआईआर 4 नवंबर 2025 को शुरू हुआ था। बंगाल में पिछली बार एसआईआर 2002 में हुआ था।

चुनाव आयोग ने बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए लगभग पांच सौ वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किये। इसमें जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस कमिश्नर शामिल हैं। दो सौ के करीब पुलिस इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर, 294 में से 73 आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर) भी बदले गए। कइयों के तो कई बार तबादले हुए तो कुछ को तमिलनाडु भेजा गया।


एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मामले में 

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी तृणमूल कांग्रेस, तबादले के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाई। चुनाव आयोग की कार्रवाई को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। पहले चरण में 16 जिलों के 152 सीटों पर 93.19 फीसदी मतदान हुआ। दूसरे चरण में 8 जिलों के 142 सीटों पर 92.63 फीसदी मतदान हुआ। पूरे बंगाल में 294 सीटों पर 92.91 फीसदी मतदान हुआ। लगभग 93 फीसदी मतदान आजादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान का रिकॉर्ड है। 



बंगाल विधानसभा चुनाव 2016 में 3 सीट जीतने वाली भाजपा 2021 के चुनाव में 77 सीट जीती थी। लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पिछले चुनाव में कांग्रेस और सीपीएम सहित वाममोर्चा का खाता तक नहीं खुला था। भाजपा 2021 में कांग्रेस व वाममोर्चा का वोट प्रतिशत और सीटें छिनने में पूरी तरह कामयाब रही थी। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भाजपा से तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचा था। जबकि, भाजपा इस विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के मत प्रतिशत और सीटों में सेंघ लगाने में पूरी तरह कामयाब रही है। उत्तर बंगाल में मजबूत भाजपा दक्षिण बंगाल में भी पैर जमाने में सफल रही है।



बहरहाल, मतदाता सूची में बदलाव साल 2026 के चुनाव का सबसे बड़ा विवादित पहलू रहा। मतदाता सूची में यह बदलाव ही विभिन्न कारणों से रिकॉर्ड मतदान का कारण रहा। यह चौंकाने वाला चुनाव परिणाम का महत्वपूर्ण कारण भी एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद तैयार किया मतदाता सूची रहा।


 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें [email protected] पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 



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